
Ranchi: झारखंड में इस बार बारिश न होने से अच्छी फसल की उम्मीदें सूख गयी हैं। राज्य सरकार की ओर से बारिश और खेती के हालात पर कराये गये सर्वे के मुताबिक 24 जिलों के 264 में से कुल 180 प्रखंड सुखाड़ की चपेट में हैं। झारखंड में 71 प्रतिशत जमीन पर धान की खेती होती है, लेकिन इस साल मात्र 20 प्रतिशत जमीन पर खेती हो पाई है।

धान राज्य की सबसे प्रमुख फसल है, लेकिन पिछले पांच सालों में इस साल इसकी सबसे कम उपज के आसार हैं। गंभीर हालात के मद्देनजर सरकार ने शनिवार को यूपीए विधायक दल की विशेष बैठक बुलाई है। इसके पहले राज्य के आपदा प्रबंधन प्राधिकार की गुरुवार को हुई बैठक में सूखा प्रभावित इलाकों के किसानों को राहत देने के उपायों पर चर्चा हुई।

पिछले पांच सालों में मॉनसून के सीजन में सभी प्रकार की फसलों की बुआई 55 से 83 फीसदी तक हुई थी, लेकिन इस साल जबर्दस्त गिरावट दर्ज की गयी है। विभिन्न फसलों को लेकर कृषि विभाग की 17 अगस्त तक की रिपोर्ट के मुताबिक धान की रोपनी मात्र 31 प्रतिशत हुई है, जबकि मकई की खेती 64 प्रतिशत, दलहन 45 प्रतिशत और तेलहन की खेती 41 प्रतिशत हुई है।
पाकुड़, साहिबगंज, गोड्डा, जामताड़ा, पलामू, गढ़वा, लातेहार और चतरा जिले में हालात सबसे खराब हैं। अब तक की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 24 में से 13 जिलों को एक्सट्रीम डाई इलाके के तौर पर चिन्हित किया गया है। सात जिलों को सिवयरली ड्राई और चार को मॉडरेट ड्राई की श्रेणी में रखा गया है।
जाहिर है, 24 जिलों में से कोई भी जिला सूखे के दुष्प्रभाव से अछूता नहीं है। 2021 के खरीफ सीजन में राज्य में 48 लाख मीट्रिक टन धान का उत्पादन हुआ था। अब तक के हालात को देखते हुए यह माना जा रहा है कि इस बार पिछले साल की तुलना में उपज में 60 से 65 फीसदी की गिरावट हो सकती है।
मॉनसूनी बारिश के प्रतिशत की बात करें तो चार जिलों पाकुड़, साहिबगंज, गोड्डा, और जामताड़ा में 67 से लेकर 71 फीसदी तक कम वर्षा रिकॉर्ड की गयी है। 18 जिलों में 21 से लेकर 58 फीसदी तक कम वर्षा हुई। सिर्फ दो जिले पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम ऐसे हैं, जहां सामान्य वर्षा हुई है।
पिछले आठ दिनों से राज्य के कई क्षेत्रों में लगातार बारिश हुई है, लेकिन धान के बिचड़े पहले ही जल गये थे। इस वजह से धान की रोपनी नहीं हो पाई। सरकार ने पलामू प्रमंडल में सूखे की स्थिति को ज्यादा गंभीर मानते हुए यहां विशेष रिपोर्ट तैयार करने के लिए कृषि निदेशक की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कमेटी गठित की है।


