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रांची में नगाड़ों की गूंज के बीच दो दिवसीय जनजातीय महोत्सव मंगलवार से

विश्व आदिवासी दिवस पर झारखंड की राजधानी रांची में 9 एवं 10 अगस्त को देश भर के जनजातीय विद्वानों, कलाकारों, साहित्यकारों और इतिहासकारों का जुटान होगा।


Ranchi: विश्व आदिवासी दिवस पर झारखंड की राजधानी रांची में 9 एवं 10 अगस्त को देश भर के जनजातीय विद्वानों, कलाकारों, साहित्यकारों और इतिहासकारों का जुटान होगा। झारखंड सरकार की ओर से कराये जा रहे इस आयोजन के दौरान देश की विभिन्न जनजातीयों की कला-संस्कृति, भाषा, खानपान, परिधान की झलक दिखेगी।

9 अगस्त को 150 नगाड़ों की गूंज के बीच वयोवृद्ध आदिवासी नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन इसका उद्घाटन करेंगे। जनजातीय समाज के इतिहास, उनकी भाषा, शिल्प, कला आदि के विविध पहलुओं पर अलग-अलग सत्रों में सेमिनार भी आयोजित होंगे। ससेक्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विनित दामोदरन, हैदराबाद विश्वविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष बी भूक्या, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के पूर्व प्रोफेसर वर्गिनियस खाखा, प्रो. नामदेव, शांता नायक, शांति खलखो, कुसुम कुमार टोप्पो सहित कई विद्वान इन सेमिनारों में शिरकत करेंगे।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद इस दो दिवसीय वृहत आयोजन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। 10 अगस्त को समापन समारोह के मुख्य अतिथि के तौर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उपस्थित होंगे।

आयोजकों की ओर से बताया गया है कि असम, ओडिशा, मध्यप्रदेश, राजस्थान और पूर्वोत्तर राज्यों के कई सांस्कृतिक दल और हस्त शिल्पकारों के समूह इस महोत्सव में भाग लेंगे। कार्यक्रम स्थल रांची के मोरहाबादी मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ-साथ खाद्य-व्यंजन, कला एवं शिल्प प्रदर्शनी भी लगायी जायेगी।

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