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OMICRON ALART: तो क्या इस दफ़े भी “धर्मनगरी की अर्थव्यवस्था” को लगेगा झटका!, “स्लो मोशन” में है कोविड वैक्सिनेशन का टास्क।

धर्मनगरी बाबाधाम में इस खतरे से निपटने के लिए स्थानीय प्रसाशन कितनी तैयार है। वह भी तब, जब देश के प्रधानमंत्री ने हाल ही में देवघर के जिलाधिकारी को भी राज्य में वैक्सिनेशन दर में फिसड्डी साबित होने पर जल्द जिले की सेहत सुधारने का निर्देश दिया था।

Deoghar: देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण की दर 0.5 फीसदी से पार करते ही जिस तरह से फौरन नाइट कर्फ्यू का एलान कर दिया गया. उससे ज़ाहिर है कि, ओमिक्रोन का आनेवाला कहर किस कदर कोहराम मचा सकता है।

ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या धर्मनगरी बाबाधाम में इस खतरे से निपटने के लिए स्थानीय प्रसाशन कितनी तैयार है। वह भी तब, जब देश के प्रधानमंत्री ने हाल ही में देवघर के जिलाधिकारी को भी राज्य में वैक्सिनेशन दर में फिसड्डी साबित होने पर जल्द जिले की सेहत सुधारने का निर्देश दिया था।

लेकिन, हकीकत और सम्भावित संक्रमण की तुलना में नतीजे बेहद ख़ौफ़नाक नज़र आते हैं। फिलहाल देवघर जिले में पहले और दूसरे डोज़ के कोविड टीकाकरण को लेकर प्रसाशन ज़द्दोज़हद में जुटी है तो, दूसरी तरफ केन्द्र की तरफ से जारी एडवाइजरी और राजधानी में लागू किए गए नाईट कर्फ्यू से बाबा नगरी के लोगो की धड़कने तेज हो गई हैं।

तीर्थयात्रियों और भोलेभक्त पर आश्रित अर्थव्यवस्था और उससे जुड़े परिवार के लिए भी नई परेशानी का शांत सैलाब धीरे धीरे कदम बढ़ा रहा है, आम जनता आनेवाले तूफानी संक्रमण के खतरों से वाकिफ़ तो हैं लेक़िन, ज़िंदगी की ज़द्दोज़हद हर खतरे पर भारी पड़ती दिख रही है सवाल यह है कि, आखिर इतना वक्त बीत जाने के बाद भी देवघर प्रसाशन किस नींद में सोई रही, क्योंकि, एक खतरे से निपटने में अबतक नाकाम एडमिनिस्ट्रेशन के सर दूसरा ख़तरा नज़रों के सामने मंडरा रहा है।

फिलहाल देश के सत्रह राज्यों में पाबंदियों का दौर शुरू हो चुका है और देवघर उन जिलों में शुमार है जहां हर रोज देशभर के श्रद्धालुओं का तांता लगा होता है ऐसे में संक्रमण के स्प्रेड का सबसे ज्यादा खतरा भी राज्य के इसी जिले और शहर को है।

बहरहाल, जल्द ही अगर राज्य सरकार और जिला प्रसाशन ने एहतियातन शख़्त कदम नहीं उठाए तो, तीसरी लहर महादेव की तीसरी नज़र से कम साबित नहीं होगा।

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