Ranchi: राजधानी रांची स्थित रिम्स अस्पताल में वायरल फीवर(Viral Fever) से पीड़ित बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यहां आए दिन बच्चे भर्ती हो रहे हैं। इस वजह से शिशु वार्ड पूरी तरह से भर गया है। हालात यह है कि बच्चों का इलाज फर्श पर गद्दा बिछाकर किया जा रहा है।

बताया गया है कि रिम्स में भर्ती होने वाले अधिकतर बच्चों में तेज बुखार, पेट दर्द, सर्दी, खासी आदि की समस्याएं आ रही है। इनमें कई ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें एक सप्ताह से बुखार, पेट दर्द आदि की समस्याएं हैं।

रिम्स पहुंचने के बाद सभी बच्चों की कोविड जांच कराई जा रही है। हालांकि, रिपोर्ट में कुछ नहीं निकल रहा है। इसके अलावा इन बच्चों की डेंगू, चिकनगुनिया की भी जांच कराई जा रही है। डॉक्टर मौसमी बुखार मानकर बच्चों का इलाज कर रहे हैं।
हालांकि, पहले मौसमी बुखार दो-चार दिन में ठीक हो जाता था लेकिन एक सप्ताह हो जाने के बाद भी ठीक नहीं होने पर बच्चों के परिजन परेशान नजर आ रहे हैं। कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए बच्चों के परिजन किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं।
इसलिए बच्चों में जैसे ही सर्दी, खांसी, जुखाम, बुखार आदि के लक्षण दिख रहे हैं तो परिजन बच्चों को लेकर सबसे पहले रिम्स पहुंच रहे हैं। रिम्स में पहुंचने के बाद डॉक्टरों द्वारा उनकी सबसे पहले कोविड जांच ही कराई जा रही है।
इस संबंध में रिम्स के प्रवक्ता डॉ डीके सिन्हा ने रविवार को बताया कि मौसमी बीमारी इस तरह के सीजन में वायरल बीमारी ज्यादा होने लगती है। बच्चे तो बच्चे, बड़ों में भी यह बीमारी होती है। इसलिए बच्चे ज्यादा संक्रमित होकर यहां इलाज के लिए आ रहे हैं।
यहां आने वाले सभी बच्चों का इलाज हो रहा है। इसके अलावा इन बच्चों की जांच भी की जा रही है। इन बच्चों की कोविड जांच भी कराई जा रही है लेकिन रिपोर्ट में कुछ भी नहीं आ रहा है।
उन्होंने बताया कि यहां शिशु वार्ड के भर जाने से कुछ बच्चों का इलाज फर्श पर गद्दा बिछाकर भी किया जा रहा है। क्योंकि, यहां जो भी मरीज आ रहे हैं उन्हें लौटा नहीं सकते। उनका इलाज करना जरूरी है।
डॉ सिन्हा ने बताया कि तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए बच्चों के लिए अलग कोविड वार्ड बनाया गया है। यहां भर्ती होने वाले सभी बच्चों की कोविड जांच हो रही है।
यहां भर्ती होने वाले अधिकतर बच्चे पांच से दस वर्ष के हैं। उन्होंने कहा कि रिम्स में व्यवस्थाओं को और दुरुस्त किया जा रहा है। मरीजों को किसी तरह की समस्या ना हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि मौसमी बीमारी में सर्दी, खासी, जुकाम, बुखार, डेंगू, चिकनगुनिया आदि होती रहती है। इसे लेकर सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। रिम्स में सामान्य बेड 70 हैं, जबकि एनआईसीयू वार्ड में 31 बेड हैं।
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