
जरमुंडी (दुमका): जरमुंडी प्रखंड कार्यालय से महज 20 किलोमीटर दूरी पर है महुआ गांव। जहां की छोटी सी बच्ची निशा कुमारी के बारे में आपको बताने जा रहे हैं।

निशा की उम्र लगभग 15 वर्ष है। निशा की मां मानसिक रोग से पीड़ित है। निशा के पिता किसी तरह मजदूरी कर कुछ रुपए कमा लेते हैं। लेकिन इतने कम रुपए से परिवार चलाना मुश्किल है। निशा पांच भाई बहन में सबसे बड़ी है, लिहाज़ा अपने भाई बहनों का ख्याल भी उन्हें रखना है। समय बचने पर वह मजदूरी भी करने निकल पड़ती हैं। जेएसपीएल के तहत आम बागवानी योजना में चल रहे कार्य में निशा की मुलाकात उसके पदाधिकारी वरुण कुमार शर्मा से हो गई। जिसने भरोसा दिलाया की हर संभव मदद करेंगे। निशा पढ़ लिख कर देश के लिए कुछ करना चाहती है।

निशा से जब n7india के संवाददाता ने बात किया तो वो बताती हैं कि हम पढ़ लिख कर कुछ बनना चाहते हैं। मज़दूरी करना उनकी मजबूरी है। वो कहती हैं कि मां का इलाज किसी तरह हो जाए तो अपने भाई बहन का ख्याल हमें नहीं रखना पड़ेगा और पढ़ लिखकर कुछ कर सकेंगे। बात करते-करते निशा की आंख भर आई।
वही आस पड़ोस की महिलाओं ने बताया कि निशा की मां मानसिक रूप से बीमार है जिस कारण यह घर के हर कार्य करती है। खेलने कूदने की उम्र में इसने अपने घर की जिम्मेदारी उठा ली है।
निशा के घर जब n7india के संवाददाता पहुंचे तो देखा चावल से भरे बर्तन तो रखे थे। लेकिन सब्जी बनाने के लिए सरसों का तेल बस कुछ ही बूंद बचा था, जिससे वह सब्जी नहीं बना पाई।
निशा के पिता भीम द्रव बताते हैं मजदूरी कर पत्नी के इलाज को लेकर जुगाड़ कर रहे हैं आज सुखजोरा मेला गया था ₹500 की बिक्री हुई। महज उसमें एक से डेढ़ सौ रुपए की कमाई हो पाई। जिससे लगता है कि आज का घर का खर्चा निकल जाएगा।
वार्ड सदस्य नीरज कुमार भंडारी कहते हैं कि सरकारी योजना के नाम पर इनको महज 25 किलो चावल ही मिल पाता है। वही हमने इलाज कराने का कोशिश तो किया लेकिन उसमें और असफल हो गया क्योंकि सरकारी सिस्टम में कहीं ना कहीं चूक है।
Jspl के BPM वरुण कुमार शर्मा ने निशा को लेकर हर सम्भव मदद का भरोसा दिलाया उन्होंने कहा कि दीदी बाड़ी योजना के तहत लाभ दिलाने का कोशिश करूंगा। जिससे पौष्टिक आहार भाई बहन को खाने से मिलेगा । इसके अलावा कुछ आय का भी जुगाड़ हो जाएगा।


