- 1947 के पूर्व यहां यहूदी और अंग्रेज एक साथ मिलकर रहा करते थे।
- रेलवे स्टेशन से लेकर लोको टैंक तक लगभग 2 दर्जन से अधिक दो मंजिला भवन उम्र रेलवे क्वार्टर आज भी इसके गवाह है।
- एनएन घटक रोड में भी यहूदियों का आधा दर्जन मकान था।
- इनमें एक मकान कोहिनूर टैबेको के मालिक एक्स कोहेन का भी था।

मधुपुर (देवघर): रंग बिरंगे फूलों की क्यारियों से निकलने वाली सुगंध और रास्तों में विचरण करने वाले रंग-बिरंगे लिवास में युवक-युवतियों की जमात निष्पाप, निर्भय और मस्ती में डूबे। यह था 1947 के पूर्व का मधुपुर।

जब 1947 के पूर्व यहां यहूदी और अंग्रेज एक साथ मिलकर रहा करते थे। तब यह क्षेत्र पश्चिम बंगाल के 24 परगना में रहने वाले यहूदियों का पर्यटक स्थल था। दिसंबर से लेकर जनवरी तक यहां यहूदियों का आना जाना लगा रहता था। यहां लगभग एक दर्जन यहूदियों का निवास स्थल था। जिनमें सबसे बड़ा मकान तिलैयाटांड़ स्थित नेशनल टैबेको के मालिक बीएन इलियास का था। इसी मोहल्ले में कुछ और यहूदियों का मकान भी था। एन एन घटक रोड में भी यहूदियों के आधे दर्जन मकान थे। इनमें एक मकान कोहिनूर टैबेको के मालिक ए. एक्स कोहेन का भी था।

लेडी मेयर की देखरेख में यहूदी विद्यार्थियों का जत्था यहां आता जाता रहता था। इसी तरह रेलवे स्टेशन से लेकर लोको टैंक तक लगभग 2 दर्जन से अधिक दो मंजिला भवन रेलवे क्वार्टर आज भी मौजूद है। जिनमें अंग्रेज रहा करते थे। सभी मकानों के पास मौसमी फूलों की भरमार थी। इन भवनों में अंग्रेज युवक-युवतियां, बच्चे और उनके कुत्ते देखने लायक थे।
आज उन भवनों में सन्नाटा छाया हुआ है:-

यहूदियों के अधिकांश कोठियां टुकड़े-टुकड़े में बिक चुकी है। फूलों की जगह गंदगी और मच्छरों का अंबार है। इसके अतिरिक्त भी नबी बक्श रोड, एनएन घटक रोड, खलासी मोहल्ला, 52 बीघा में भी अंग्रेजों के निवास स्थान थे। लार्ड सिन्हा रोड पर डब्ल्यू एच. होल, एस रोजारियो, विक्टर ली, डेनियल निल आदि विभूतियों के निवास स्थल थे। नेताजी सुभाष रोड में दो मंजिला स्कूल था। जहां अंग्रेज विद्यार्थी अध्ययन करते थे। इस स्कूल के प्रधानाध्यापक फ्रैंकलीन डैरिक थे। इस स्कूल में पढ़ने वाले विभिन्न स्थानों के विद्यार्थी छात्रावास में रहते थे। अंग्रेजों के मनोरंजन के लिए रेलवे इंस्टिट्यूट था। अभी यहां रेलवे एईएन कार्यालय है।
कुल मिलाकर 1947 के पूर्व की यहां की अंग्रेज यहूदियों की साझी संस्कृति अब लुप्त हो चुकी है।


