
Jamui: झारखंड के संथाल परगना और बिहार के कई इलाकों में जाने माने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एन.डी मिश्रा अब नई पारी की शुरुआत राजनीति से कर रहे हैं।

डॉ. एन. डी मिश्रा ने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज का दामन थामा है। जामुई जिले के झाझा विधानसभा में इनके पार्टी में आने से राजनीति सरगर्मी बढ़ गई है।

राजनीति में सक्रिय सत्तारूढ़ और विपक्ष दोनों ओर इस बात की कानाफूसी शुरू हो गई है कि डॉ. एन.डी मिश्रा जिस तरीके से एक सफल नेत्र रोग विशेषज्ञ रहे हैं। कहीं ऐसा ना हो की राजनीति के पटरी पर सफलता प्राप्त करते हुए विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब न दे दें।
हालांकि डॉक्टर की भूमिका और राजनीति में भाग्य आजमाना दोनों सिक्के के दो पहलू हैं।
लेकिन ये भी सत्य है कि मृदभाषी डॉ. मिश्रा लोगों की दिलों पर राज करने का हुनर बखूबी जानते हैं।
स्वास्थ्य सेवा करते हुए डॉ. मिश्रा ने न जाने कितनों की मदद की है। जिसमें बिहार के जमुई जिला के लोग भी शामिल हैं।
झारखंड के साथ-साथ बिहार के जमुई जिले के झाझा विधान सभा में भी काफी लोकप्रिय हैं डॉ. मिश्रा। यह बात इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि मानवता के नाते बिहार से आए हुए लोगों को भी मदद करने का काम वो सालों से करते आ रहे हैं।
शायद यही वजह रही होगी कि बिहार की सरजमीं पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी जन सुराज पार्टी ने डॉ एन डी मिश्रा को अपने पार्टी में महत्वपूर्ण जगह दी है। कयास लगाना गलत न होगा कि पार्टी विधानसभा चुनाव में मिश्रा जी को झाझा विधानसभा से अपना उम्मीदवार बनाने की घोषणा कर सकती है।
अब झाझा विधानसभा की राजनीति समीकरण की बात की जाए तो आने वाले समय में एन.डी मिश्रा सभी उम्मीदवारों पर भारी पड़ सकते हैं। कारण ये भी है कि वर्तमान में सत्तारूढ़ दल के विधायक के लिए जनता के बीच समर्थन कम शिकायतें ज्यादा दिखने को मिल रही। इधर, राजद के दो उम्मीदवार यहां से अपना भाग्य आजमाने की कोशिश में एड़ी चोटी एक किए हुएं हैं। ऐसे में मृदभाषी समाज सेवी और एक अच्छे डॉक्टर को जनता लोकतंत्र में अगर अपने क्षेत्र की कमान दे दे तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।
हालांकि राजनीति में समय से पहले कुछ भी कहना उचित नहीं है। ऊंट किस करवट बैठेगा ये तो जनता जनार्दन बेहतर जानती है।


