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7 महीने तक कोरोना संक्रमित रही HIV पॉजिटिव महिला, शरीर में वायरस ने 32 बार बदला स्वरूप

एचआईवी संक्रमित महिला करीब सात महीने तक कोरोना वायरस की चपेट में रही। इस दौरान सार्स-कोव-2 वायरस उसके शरीर में करीब 32 बार अपना स्वरूप बदला। वायरस के इतने म्यूटेशन का पता लगाने के बाद से वैज्ञानिक हैरान रह गए हैं।

एचआईवी संक्रमित महिला करीब सात महीने तक कोरोना वायरस की चपेट में रही।  इस दौरान सार्स-कोव-2 वायरस उसके शरीर में करीब 32 बार अपना स्वरूप बदला। वायरस के इतने म्यूटेशन का पता लगाने के बाद से वैज्ञानिक हैरान रह गए हैं। इसमें खतरनाक अल्फा वेरिएंट (Alpha variant) भी शामिल है। यह मामला दक्षिण अफ्रीका का है। डरबन स्थित क्वाजूलू-नेटल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इसका खुलासा किया है।

दक्षिण अफ्रीका (South Africa) में वैज्ञानिकों को HIV से जूझ रही एक 36 वर्षीय महिला में कोरोनावायरस के खतरनाक म्यूटेशन (Coronavirus Mutation) मिले हैं। महिला के शरीर में 216 दिन तक कोविड-19 वायरस (Covid-19) मौजूद रहा। इस दौरान वायरस ने 30 ज्यादा म्यूटेशन पैदा किए। इस मामले की रिपोर्ट को मेडिकल जर्नल medRxiv में प्रीप्रिंट के रूप में प्रकाशित किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, महिला 2006 में HIV से संक्रमित हुए थी। समय के साथ महिला का इम्यून सिस्टम कमजोर होता चला गया। सितंबर 2020 में महिला कोविड-19 से भी संक्रमित हो गई। इसके बाद वायरस ने स्पाइक प्रोटीन में 13 म्यूटेशन किए और 19 अन्य जेनेटिक परिवर्तन भी किए। इसकी वजह से वायरस का व्यवहार बदल गया। कुल मिलाकर महिला के शरीर में वायरस के 32 म्यूटेशन पैदा हो गए। इनमें से कुछ वेरिएंट्स वायरस के ‘वेरिएंट्स ऑफ कंसर्न’ (चिंता वाले वेरिएंट्स) हैं।

अन्य लोगों तक म्यूटेशन फैलाने के सबूत नहीं

महिला के शरीर में मिले वेरिएंट्स में E484K म्यूटेशन शामिल है, जो सबसे पहले ब्रिटेन में देखने को मिला था और ये अल्फा वेरिएंट (Alpha variant) B.1.1.7 का हिस्सा है। इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका में पहली बार मिला बीटा वेरिएंट (Beta variant) B.1.351 का N510Y म्यूटेशन भी महिला के शरीर में देखने को मिला। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि क्या महिला ने इस म्यूटेशन को अन्य लोगों तक फैलाया है या नहीं।

HIV संक्रमित लोग बन सकते हैं वेरिएंट्स की फैक्ट्री!

वैज्ञानिकों ने कहा कि ये शायद कोई संयोग नहीं है कि अधिकांश नए वेरिएंट्स दक्षिण अफ्रीका के क्वाजुलु नटाल (KwaZulu Natal) जैसे क्षेत्रों से सामने आए हैं, जहां 4 में से 1 वयस्क HIV पॉजिटिव है। हालांकि, HIV संक्रमित लोगों के कोरोना से संक्रमित होने और खतरनाक मेडिकल कंडीशन में जाने की संभावना को लेकर बेहद ही कम सबूत हैं। लेकिन वैज्ञानिकों ने चेतावनी देते हुए कहा कि HIV संक्रमित मरीजों में अगर ऐसे ही मामले सामने आते रहे, तो ये पूरी दुनिया के लिए वेरिएंट्स की फैक्ट्री बनकर उभर सकते हैं।

कमजोर इम्युनिटी वाले मरीज में ज्यादा समय तक मौजूद रह सकता है वायरस

डरबन में क्वाजुलु-नताल यूनिवर्सिटी (University of KwaZulu-Natal) के एक जेनेटिसिस्ट और स्टडी के लेखक ट्यूलियो डी ओलिवेरा ने LA Times को बताया कि कम इम्युनिटी वाले मरीज के शरीर में कोविड-19 वायरस दूसरों की तुलना में अधिक समय तक मौजूद रह सकता है। इस महिला के मामले को लेकर डी ओलिवेरा ने कहा, शुरुआती लक्षणों के दौरान महिला में कोविड के हल्के लक्षण दिखाई दिए, जबकि उसके शरीर में कोरोनावायरस मौजूद था।

एचआईवी संक्रमित महिलाओं पर किया गया था शोध

अमेरिकी न्यूज एजेंसी के मुताबिक इसका खुलासा उस समय हुआ जब एचआईवी संक्रमितों के प्रतिरोधक तंत्र की प्रतिक्रिया समझने के लिए प्रतियोगिता आयोजित की थी। इस प्रतियोगिता में 300 एचआईवी संक्रमित महिलाओं को चुना गया था। इसी दौरान महिला के शरीर में कोरोना वायरस की जेनेटिक संरचना में लगभग दो दर्जन म्यूटेशन का मामला सामने आया। क्योंकि पीड़ित महिला में संक्रमण के मामूली लक्षण उभरे थे। शोध के दौरान चार एचआईवी संक्रमित मिले हैं, जिनमें कोरोना संक्रमण एक महीने से ज्यादा समय तक मौजूद था।

दक्षिण अफ्रीका में कोरोना का फैलाव तेज

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि यह खोज महामारी की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण है। एचआईवी प्रभावित देशों में ऐसे मरीजों में वायरस को फैलने से रोकने के लिए इस मुहिम में तेजी आएगी। बता दें कि अफ्रीका देशों में कोरोना संक्रमण ने भी कहर बरपाया है। दक्षिण अफ्रीका कोरोना से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालांकि दक्षिण अफ्रीका में अब कोरोना का प्रसार कम हुआ है। 

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