
Deoghar: झारखंड के गोड्डा लोकसभा से बीजेपी सांसद डॉ. निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने फेसबुक पोस्ट कर लिखा है.. हाँ मैं जिद्दी हूँ। ये पोस्ट उन्होंने उस वक़्त किया जब 10 माह से लटका पड़ा देवघर एयरपोर्ट को जोड़ने वाला अप्रोच सड़क नरेंद्र मोदी पथ का उद्घाटन बीजेपी के दिगज्जों द्वारा किया गया।

मंगलवार को देवघर एयरपोर्ट के अप्रोच सड़क “नरेंद्र मोदी पथ” का उद्घाटन झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश और गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने संथाल के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में किया। ये वही 25 फ़ीट लम्बी अप्रोच सड़क है जिसके निर्माण को लेकर झारखण्ड सरकार द्वारा गंभीरता नहीं दिखाने पर डॉ. निशिकांत की पहल से न सिर्फ रैयतों ने अपनी जमीन दान में दे दी, बल्कि इस पथ का निर्माण भी स्थानीय लोगों ने ही कराया। जिसका नाम रखा गया “नरेंद्र मोदी पथ” .


अब इस अप्रोच सड़क के उद्घाटन के बाद देवघर एयरपोर्ट से उड़ान सेवा जल्द शुरू होने की उम्मीद बढ़ गयी है। “नरेंद्र मोदी पथ” उद्घाटन के कुछ समय बाद ही निशिकांत दुबे ने फेसबुक पर अपने इमोशन को जाहिर करते हुए लिखा कि “हाँ मैं जिद्दी हूँ” ….
निशिकांत दुबे ने लिखा है “मुझे विपक्षी लोगों ने अहंकारी, जिद्दी , घमंडी, कॉरपोरेट घरानों का एजेंट, बाहरी , अप्रवासी , कट्टरवादी न जाने कितनी प्रकार के विशेषणों से महिमामंडित किया। मेरा कसूर इतना ही है कि मैं अपने क्षेत्र में पीने का जल, बेहतर सड़क, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था, क्षेत्र को हिंदुस्तान के विभिन्न कोनों से जोड़ने के लिए अत्यधिक रेलगाड़ियों का परिचालन, शिक्षा में गुणात्मक सुधार हेतू सैनिक स्कूल का निर्माण, पावर प्लांट, कल कारखाने की स्थापना, क्षेत्र के विभिन्न कोनों में इंटरनेट की कनेक्टिविटी, बायोडायवर्सिटी के संरक्षण हेतु पार्को का निर्माण, पर्यटन के विकास हेतु अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन का निर्माण , अंतरराज्यीय बस अड्डे की स्थापना, कृषि में गुणात्मक सुधार हेतु कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना, हमारी संस्कृति को अछुन रखने हेतु प्राचीन पांडुलिपियों का संरक्षण, बैद्यनाथ धाम की यात्रा को अविस्मरणीय बनाने हेतु सुविधाओं में व्रिद्धि, बैद्यनाथ धाम की धार्मिक महत्व को अंतरराष्ट्रीय पहचान, कयू कॉम्प्लेक्स का निर्माण, प्लास्टिक पार्क का निर्माण, सुदूर क्षेत्रों तक सड़कों का जाल, सभी घरों में निर्वाध बिजली व पानी की सुविधा, गरीबों के लिए सस्ते आवास, सभी क्षेत्रों में उपयुक्त स्वास्थ्य सुविधाएं, बच्चों के बौद्धिक विकास हेतु अत्याधुनिक पुस्तकालयों का निर्माण और अन्य कार्य। सोचिये जब कोई व्यक्ति इलाज के अभाव में इस दुनिया से चला जाता है तो जिम्मेवारी किसकी ? मुंशी प्रेमचंद जी ने अपनी एक कहानी में कहा था कि विगाड़ के डर से ईमान की बात नहीं करोगे? , अगर मैं क्षेत्र के विकास हेतु अपनो का सैध्यन्तिक विरोध करता हूँ तो क्या गुनाह करता हूं।संयुक्त बिहार से ही यहाँ के लोगों की मांग थी पीने का पानी। अगर इसके लिए मैंने जनांदोलन किया, अदालत की शरण ली तो आज पुनासी डैम अपने स्वरूप को प्राप्त कर सका और आने वाले वर्षों में जनता को पीने का पानी और खेतों की प्यास बुझाने हेतु जल मिलता रहेगा तो यह मेरा अहंकार है।आज दोआब क्षेत्र में केंद्र सरकार के द्वारा संचालित आयुर्विज्ञान संस्थान का शुभारंभ क्या किसी ने कल्पना की थी ? यह मेरी जिद है और यह समस्त जनता जनार्दनों के हृदय से मेरे ऊपर विश्वास व आशीर्वाद का प्रतिफल है। श्रावणी मेला इस क्षेत्र की पहचान है, मेला को मंदिर के आसपास केंद्रीत रखने हेतु और देवतुल्य कांवरियों को सुविधा उपलब्ध कराने हेतु मानसरोवर तालाब के किनारे कयू कॉम्प्लेक्स का निर्माण मेरे स्वार्थ से जोड़कर देखा जाता है और मुझे पुरोहितों का दुश्मन प्रोजेक्ट किया जाता है, लोग दिल पर हाथ रख कर बोलें की इससे क्या नुकसान हुआ है ? 2009 के पहले जिन जिन जनप्रतिनिधियों ने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया क्या वो सभी यहीं पैदा हुए थे ? लेकिन उनकी कर्म भूमि यह क्षेत्र रहा था। तो मुझे मेरे कर्मक्षेत्र में कार्य करने से भला कोई रोक पाएगा क्या ? मैं भोलेनाथ का पुत्र हूं और उनकी ही प्रेरणा से मुझे इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य लगातार यहां की जनता के आशीर्वाद से मिलता रहा है।और आगे भी मिलता रहेगा यह मेरा विश्वास है। मेरा विरोध करने के लिए जितना खर्च विभिन्न अदालती कार्यवाही में वकीलों के ऊपर राज्य की जनता के टैक्स का पैसा खर्च किया गया शायद उतना पैसा विकास में लगा देते तो जनता का कल्याण ही होता। मै बाबा नगरी में पला बढ़ा, एक साधारण परिवार का सदस्य हूं जो आज बाबा के पुनरबुलावे पर ही क्षेत्र का जनप्रतिनिधि हूं और उन्हीं की प्रेरणा से क्षेत्र की जनता की समस्या को दूर करने का प्रयास करता रहूंगा और विकास की नई ऊंचाई को लक्ष्य बनाकर चलता रहूँगा। जय बाबा बैद्यनाथ।”


