
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने बहनों से गैंग रेप के मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगतने के दौरान चार साल पहले मरने वाले आरोपित शिक्षक धारासिंह और सह आरोपित बद्री प्रसाद मीणा को दोष मुक्त करते हुए निचली अदालत के आजीवन कारावास देने के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायाधीश प्रकाश गुप्ता और न्यायाधीश सीके सोगनरा की खंडपीठ ने यह आदेश बद्री प्रसाद और धारा सिंह की ओर से दायर अपील को स्वीकार करते हुए दिए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष अपीलार्थियों पर आरोप तय करने में असफल रहा है। ऐसे में निचली अदालत के आदेश को रद्द किया जाता है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान वर्ष 2017 में धारा सिंह की मौत हो गई। इस पर उसके पुत्र ने अपील पर सुनवाई जारी रखने की गुहार करते हुए प्रकरण में पक्षकार बन गया।

आरोपितों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नासिर अली नकवी ने अदालत को बताया कि मामले में पीडिता के पिता ने जुलाई 2012 में अलवर के टेहला थाने में अपीलार्थियों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराया था। वहीं बाद में पुलिस ने गैंग रेप के आरोप में अपीलार्थियों के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया।
जिस पर सुनवाई करते हुए अलवर कोर्ट ने 25 फरवरी 2015 को अपीलार्थियों को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। अपील में कहा गया कि घटना को लेकर पीडिताओं के बयान विरोधाभासी हैं। इसके अलावा स्कूल की रसोई में दुष्कर्म की बात कही गई है, लेकिन रसोई की इंचार्ज ने अपने बयानों में ऐसी घटना से इनकार करते हुए स्कूल समय के बाद वहां ताला लगाकर जाने की बात कही।
वहीं पीडिताओं के शरीर पर कोई चोट भी नहीं आई और जांच अधिकारी को मौके पर सामूहिक दुष्कर्म के हालात भी नहीं मिले। अपील में यह भी कहा गया कि आरोप पत्र में पीडिता की ओर से दुष्कर्म की जानकारी पिता को देने का हवाला है, इसके बावजूद पिता ने सिर्फ अपहरण का आरोप लगाते हुए ही एफआईआर दर्ज क्यों कराई। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने दोनों आरोपितों को बरी कर दिया है।
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