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आस्था का प्रतीक बन चुकीं कृष्णा बम दूसरी सोमवारी को भी बाबा मंदिर, बाह्य अरघा से किया जलार्पण


देवघर।

आस्था का प्रतीक बन चुकीं कृष्णा बम दूसरी सोमवारी को भी बाबा मंदिर पहुंची। कृष्णा बम पिछले 38 सालों से श्रावण की प्रत्येक सोमवारी को पैदल कांवर यात्रा कर बाबाधाम पहुंचती हैं. 

कृष्णा बम

सावन के प्रत्येक सोमवार को कृष्णा 'डाक बम' के रूप में देवघर पहुंचती हैं और बाबा वैद्यनाथ का जलाभिषेक करती हैं. इस साल भी बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर की रहने वाली कृष्णा बम से माँ कृष्णा बन चुकी कृष्णा बम दूसरी सोमवारी पर बाबा मंदिर पहुंची। बाह्य अरघा के ज़रिये बाबा बैद्यनाथ का जलार्पण कृष्णा बम ने किया। 

आज कृष्णा बम किसी परिचय की मोहताज नहीं. जब सुल्तानगंज से वे जल भर कर देवघर के लिए निकलती हैं, तो पूरे रास्ते में उनके दर्शन को लोगों का हुजूम लग जाता है.  उन्हें देखने और उनसे आर्शीवाद लेने के लिए रास्ते में हजारों लोग पंक्तिबद्ध खड़े रहते हैं.  वे सुल्तानगंज में जल भरने के बाद 12 से 14 घंटे में देवघर पहुंच जाती हैं. भगदड़ से बचने के लिए अब उनकी सिक्योरिटी में पुलिस लगी रहती है.

कृष्णा

कांवर यात्रा को लेकर कृष्णा बम कहती हैं कि विवाह के बाद उनके पति नंदकिशोर पांडेय हैजा से पीड़ित हो गए थे. दिनों-दिन उनकी हालत खराब होती जा रही थी. तब उन्होंने संकल्प लिया कि पति के ठीक होने पर वह कांवर लेकर हर साल सावन में बाबा वैद्यनाथ का जलाभिषेक करेंगी. भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना सुन ली. तभी से वे हर साल जलाभिषेक करने जाती हैं.


गुरुकुल

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