
Bhopal: भोपाल में एक निजी स्कूल में नर्सरी में पढ़ने वाली साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची के साथ 8 सितम्बर को स्कूल बस में दुष्कर्म करने करने के दोषी चालक हनुमत जाटव को भोपाल जिला कोर्ट की विशेष न्यायाधीश शैलजा गुप्ता (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम) ने सोमवार को मरते दम तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जबकि उसकी मदद करने वाली केयर टेकर (आया) उर्मिला साहू को 20 साल कैद की सजा सुनाई। दोनों पर 32-32 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि घिनौना अफराध करने वाले को सभ्य समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

मामले में पैरवीकर्ता विशेष लोक अभियोजन अधिकारी मनीषा पटेल ने बताया कि घटना 8 सितंबर, 2022 की है। बच्ची भोपाल के नीलबड़ इलाके के निजी स्कूल में पढ़ती है। स्कूल बस के चालक ने बस में ही बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। जब बच्ची घर लौटी, तो उसके कपड़े बदले हुए थे। यह देख मां हैरान हुई। बाद में उन्हें बच्ची के प्राइवेट पार्ट्स पर खरोंच के निशान भी नजर आए। शक हुआ तो बच्ची से पूछा कि आपको कोई बैड टच करता है। इस पर बच्ची ने बताया था कि बस के ड्राइवर अंकल बुरे हैं, वे बैड टच करते हैं। बच्ची के पेरेंट्स ने स्कूल मैनेजमेंट से संपर्क किया। बाद में घटना की शिकायत पुलिस कमिश्नर से की। महिला थाना पुलिस ने बस ड्राइवर पर केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। जांच के लिए एसआईटी बनाई गई थी। टीम ने घटना के 20 दिन के अंदर 242 पेज का चालान कोर्ट में पेश किया। तीन महीने के अंदर 32 लोगों की गवाही हुई।


उन्होंने बताया कि मामले में शनिवार को सुनवाई के दौरान पीड़ित बच्चियों के बयान को ही अदालत ने मुख्य आधार माना। इसी आधार पर कोर्ट ने आरोपित बस चालक हनुमत जाटव और केयर टेकर उर्मिला साहू को दोषी करार दिया। मामले में जांच टीम एक भी भौतिक साक्ष्य पेश नहीं कर पाई। इसके बाद परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने शनिवार को ही कोर्ट ने मुख्य आरोपी हनुमत जाटव को धारा 376 (एबी), 376 (2) और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार दिया था। केयर टेकर उर्मिला साहू को धारा 109 और 16/17 में दोषी पाया था। सोमवार को जिला कोर्ट की विशेष न्यायाधीश शैलजा गुप्ता (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम) ने सोमवार को सुनाया। तीन महीने में ही इस केस में फैसला आ गया। विशेष लोक अभियोजक मनीषा पटेल ने बताया कि पीड़ित 2 बच्चियां हैं, इसलिए हनुमत पर 16-16 हजार और उर्मिला को 16-16 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
सजा सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश शैलजा गुप्ता ने कहा कि दोनों बच्चियां महज साढ़े तीन साल की अबोध बालिकाएं हैं। जिन्होंने अभी जीवन की शुरुआत ही की है। जीवन के सफर में परिवार से बाहर पहला कदम शिक्षा के लिए रखा था। जहां आरोपी हनुमत व उर्मिला को बच्चे अंकल और दीदी कहते थे। उन पर विश्वास भी करते थे। बच्चों को सुरक्षित घर से स्कूल और स्कूल से घर लाने ले जाने की जिम्मेदारी उनकी थी। बच्चियां नासमझ हैं कि न तो उन्हें अच्छे-बुरे का ज्ञान है और न ही मनोभावों को व्यक्त करने के लिए पर्याप्त शब्द।
इधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के एक निजी स्कूल की बस में मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में न्यायालय द्वारा आरोपी वाहन चालक को आजीवन कारावास और आया को 20 साल के कारावास की सजा के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इस मामले में तत्परता से कार्रवाई कर न्यायालय के सामने तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत करने पर भोपाल पुलिस और प्रशासन को बधाई दी है।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि इस तरह का घिनौना अपराध करने वाले को सभ्य समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है। मध्यप्रदेश की धरती पर ऐसे अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। हमारी सरकार ऐसे नरपिशाचों को कठोर से कठोर सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन सहित उन सभी लोगों का भी आभार माना है, जिन्होंने मासूम को न्याय दिलाने में योगदान दिया और सहभागिता की। (Input-HS)


