
Deoghar: आज के इस भागम-भाग भरी जिंदगी में जब हर व्यक्ति आगे निकलने की होड़ में जुटा है तो एक बेटा स्वयं के सपने को छोड़कर पिता की इच्छा पूरा करने सात समंदर पार मिली नौकरी छोड़ वापस लौट आया। ऑस्ट्रेलिया में मिले लाखों की नौकरी को बगैर ज्वाइन किये अपने पिता की विरासत संभालने एक बेटा घर तो लौटा, लेकिन यहां उसने अपने सपने बुनें और कामयाबी की नई राह तलाश ली।

यहां बात हो रही है देवघर जिले के जाने-माने व्यवसाई रंजीत कुमार सिंह उर्फ़ जवाहर के इकलौते पुत्र कनिष्क कश्यप की। संत फ्रांसिस स्कूल,देवघर से 10वीं और आर के मिशन, देवघर से 12वीं पास करने के बाद कनिष्क कश्यप ने SRM यूनिवर्सिटी चेन्नई से इलेक्ट्रॉनिक इंजिनियरिंग साल 2016 में किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद कनिष्क ने साल 2018 तक कोलकाता में कोग्निजेंट के अंडर बैंक ऑफ़ अमेरिका के बैंकिंग सेक्टर के कार्ड एंड पेमेंट सेगमेंट में काम किया। इस दौरान विदेश से भी काम करने का अवसर मिल रहा था। ऑस्ट्रेलिया में एक कंपनी में अच्छी सैलेरी पर जॉब लग भी गयी थी कि इसी बीच पिता रंजीत सिंह का एक कॉल गया।

बेटे कनिष्क को विदेश जाने से रोक रंजीत सिंह ने अपने कारोबार को संभालने देवघर बुला लिया। बेदिल, बेमन से कनिष्क देवघर तो लौटा लेकिन उसकी ख्वाहिश कुछ अलग और बड़ा करने की थी। पिता की बात मान वो कारोबार के गुर सिखने की कोशिश तो करता लेकिन कुछ समझ नहीं आता। कनिष्क ने देवघर लौट करीब एक साल जैसे-तैसे काटे। फिर प्लानिंग की कुछ अलग करने की। पिता का कारोबार तो था ही, लेकिन खुद से कामयाब होने की ख्वाहिश के साथ साल 2019 में अपनी एक छोटी सी कंपनी बनाई। सिंह ट्रेडर्स नाम की कम्पनी बना कारोबार शुरू किया। सबसे पहले जिओ का डिस्ट्रीब्यूटरशिप लिया, फिर कारोबार को बड़ा करते हुए रियल मी और शाओमी के डिस्ट्रीब्यूटर बनें। अब दुर्गा पूजा में व्रल्फूल का डिस्ट्रीब्यूटरशिप भी शुरू हो जायेगा।
काफी कम दिनों में लाखों के टर्न अप पर खड़ा कर चुके अपने कारोबार के जरिये कनिष्क कश्यप ने अभी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से करीब 50 से 60 लोगों को रोजगार दे रखा है। कनिष्क कश्यप कहते हैं कि भविष्य में उनकी प्लानिंग कुछ बड़ा करने की है। संथाल के सभी जिलों में मल्टीब्रांड आउटलेट खोलने की योजना है। इसके अलावा भी बहुत कुछ है जो वक़्त आने पर दिखेगा। वो बताते हैं कि देवघर लौटना एक वक़्त में जहां उन्हें परेशान करता था आज जिंदगी जीने की वजह बन गया है। अच्छा लगता है जब आप अपनी जगह पर अपनों के लिए कुछ कर पाते हैं। नौकरी छोड़ने के सवाल पर वो कहते हैं शुरू-शुरू में ये काफी तकलीफ देता था। लेकिन अब काम में मज़ा आता है। कहीं नौकरी करने से ज्यादा बेहतर है किसी को नौकरी दे पाना। कहा कि जॉब में सेटिस्फेक्शन नहीं है चाहे जितनी भी मेहनत कर लें। यहां थोड़ी सी अचिवमेंट बड़ी खुशियां लेकर आती हैं।
आज के युवाओं को कनिष्क कहते हैं कि काम कोई भी हो बुरा नहीं होता, आप बस एक कोशिश करें। शुरुआत छोटी ही होगी लेकिन कामयाबी बड़ी मिलेगी। बस मेहनत करना न छोड़ें।
कनिष्क कश्यप के परिवार की बात करें तो उनके पिता रंजीत कुमार नामचीन व्यवसाई हैं। माँ श्वेता किरण सिंह हाउस वाइफ हैं। बहन डॉ. गार्गी कश्यप चिकित्सक हैं तो वहीं एक और छोटी बहन मैत्री कश्यप अभी पढ़ाई कर रहीं हैं।


