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सावन माह में जहां गूंजते थे बोलबम के नारे आज वहां पसरा है सन्नाटा

सावन माह में जहां बाबा बैद्यनाथ मंदिर के प्रांगण में पांव रखने तक की जगह नहीं मिलती थी। आज मंदिर प्रांगण पूरी तरह से सुनसान पड़ा है।

Deoghar: झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी देवघर जहां श्रावण माह में लाखों लाख की संख्या में श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ मंदिर जल अर्पण करने के लिए पहुंचते हैं। 108 किलोमीटर की दूरी तय कर उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर बाबा भोले पर जलार्पण करते हैं। ऐसी मान्यता है कि श्रावण माह में सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर कांवर यात्रा कर पैदल बैद्यनाथधाम पहुंचकर जल अर्पण करने वालों की साड़ी मनोकामनाएं बाबा बैद्यनाथ पूर्ण करते हैं।

सदियों से चली आ रही यह परंपरा पिछले वर्ष ही कोरोना महामारी के कारण टूट गयी थी। जिसके बाद श्रद्धालु की उम्मीद थी कि इस वर्ष सावन मेला लगेगा और कावड़ यात्रा की अनुमति दी जाएगी। लेकिन कोरोना के संभावित तीसरे लहर को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा मंदिर को बंद रखने और कावड़ यात्रा पर रोक का निर्णय लिया गया। इस फैसले से श्रद्धालु काफी नाखुश भी नजर आए।

बाबा मंदिर में पसरा है सन्नाटा

आज से सावन की शुरुआत हो गयी है। सावन माह में जहां बाबा बैद्यनाथ मंदिर के प्रांगण में पांव रखने तक की जगह नहीं मिलती थी। आज मंदिर प्रांगण पूरी तरह से सुनसान पड़ा है। ना तो श्रद्धालुओं की भीड़ है ना ही बोल बम के जयकारे की गूंज। सावन माह में गेरुआ रंग से रंगी रहने वाली बाबानगरी आज आम दिनों जैसी ही नजर आ रही है।

मुसीबत में व्यवसायी

इसके साथ ही देवघर में सिर्फ सावन मेला से अरबों का कारोबार छोटे-बड़े व्यवसाई करते आ रहे हैं। लेकिन पिछले दो सालों से मेला नहीं लगने से उन सब पर भी अब भारी मुसीबत आ गयी है। लगभग सभी दुकान के किराए से लेक, बच्चों के पढ़ाई और पेट की आग को बुझाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। जिनकी पूरी आजीविका मेले पर टिकी रहती थी, आज मेला नहीं लगने से अब उनके आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।

स्थानीय दुकानदार और पुरोहित समाज ने सरकार से मांग की है कि सिमित संख्या में भक्तों को मंदिर तक पहुंचने दिया जाए। अगर थोड़े श्रद्धालु भी पहुंचते हैं तो काफी राहत मिलेगी।

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