
Deoghar: द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ की मंदिर परिसर में दो नए फुट ओवर ब्रिज के निर्माण को लेकर विवाद अब बड़ा रूप ले चुका है। प्रशासन द्वारा सौंदर्यीकरण को लेकर मन्दिर परिसर में शुरू की गई खुदाई का तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों ने विरोध किया है।

पुरोहितों का आरोप है कि विकास के नाम पर मंदिर की सैकड़ों वर्ष पुरानी धार्मिक धरोहर को नष्ट किया जा रहा है।
पुरोहितों का कहना है कि मंदिर प्रांगण की शिलाएं अति प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व रखता है। शिलाओं को तोड़ना न केवल मंदिर की मूल संरचना को नुकसान पहुंचाना है, बल्कि यह करोड़ों शिवभक्तों की आस्था पर भी प्रहार है। उनका तर्क है कि भीड़ नियंत्रण के लिए मंदिर के भीतर खुदाई करने के बजाय प्रशासन को बाहरी क्षेत्र से वैकल्पिक रास्ता निकालना चाहिए।


मन्दिर के पुरोहित मृत्युंजय पंडित ने कहा, “यह मंदिर प्रांगण हमारे पूर्वजों की अथक मेहनत और आस्था का प्रतीक है। यहाँ की वास्तुकला ऐसी है जिसे आज के आधुनिक इंजीनियर भी नहीं दोहरा सकते। दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिसकी जिम्मेदारी मंदिर के संरक्षण की है, वही इसे तोड़ने में लगा है।”
परिसर में कई जगहों पर गड्ढे खोदकर प्राचीन शिलाखंडों को उखाड़ फेंका गया है। ऐतिहासिक महत्व के ‘तुलसी चौरा’ को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया है।

महाकाल मंदिर के पास स्थित प्राचीन यंत्रनुमा पत्थरों, जो रहस्यों से भरे हैं, उन्हें भी हटा दिया गया है। पुरोहितों ने प्रशासन से सवाल किया है कि क्या श्रद्धालुओं की सुविधा का अर्थ मंदिर की प्राचीनता को समाप्त करना है?
मृत्युंजय पंडित ने चेतावनी देते हुए कहा कि मंदिर के भीतर किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि निर्माण कार्य तत्काल नहीं रोका गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



