
Deoghar: न गाड़ी है, न काफिला, न हुजूम है, न बैनर-पोस्टर और न ही कोई तामझाम। निकल पड़ा हूँ अपनी मंजिल की ओर। चाहत है कि आपकी उम्मीदों पर खरा उतरूं। ऐसी ही एक दास्ताँ लिए देवघर नगर निगम की सड़कों पर घर-घर घूम रहा एक शख्स। वो शख्स जिसके ख्वाब बड़े हैं लेकिन उसे मुकम्मल करने के लिए सिवाए हौंसला के और कुछ भी पास नहीं है।

इस शख्स का नाम है अशोक कुमार मिश्रा। देवघर नगर निगम क्षेत्र के झौंसागढ़ी स्थित माथाबांध के रहने वाले अशोक कुमार मिश्रा पिछले सात सालों से लगातार अपने ख्वाबों को पंख देने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं। एक मोटर साइकिल के सहारे घर-घर पहुँच वो लोगों से उनकी परेशानी पूछते हैं साथ ही उस परेशानी को दूर करने का भरोसा देते हुए बस वो एक वोट की दरख्वास्त कर रहे।

दरअसल, अशोक मिश्रा देवघर नगर निगम से मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं। लेकिन, उनके पास न तो धन है, न बल। यानि पावर और पैसा दोनों की बेइंतहा कमी के साथ वो मेयर की कुर्सी तक जाने का रास्ता तलाश रहे।
अशोक कहते हैं कि मेयर पद की चाहत पावर और पैसे के लिए नहीं बल्कि आम जनता के लिए है। जहां देवघर की जनता आसानी से पहुंच सके। जहां जनता की एक आवाज़ पर उनका मेयर उन तक पहुँच सके। आम जनता की बुनियादी समस्याओं को दूर कर सकूँ। इसी एजेंडे के साथ इस बार चुनाव में खड़ा होने जा रहा हूँ।
दिलचस्प बात ये है कि उनकी हालत ऐसी है कि कभी कभार बाइक के पेट्रोल भराने तक के पैसे भी नहीं रहते। लेकिन, आम जनता में से ही कोई शुभचिंतक पेट्रोल तक भरा देता है। धीरे-धीरे जिस तरह उन्हें लोगों का साथ मिल रहा, इससे ऐसा लग रहा मानों अब लोग उन्हें पहचानने लगे हैं। लोग उन्हें स्वीकार कर रहे। उनकी बातों से सहमत हो रहे हैं।
ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि एक मोटर साइकिल वाला कहीं बड़ी-बड़ी गाड़ियों के काफिले पर भारी न पड़ जाये।


