
Deoghar : स्वास्थ्य विभाग संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए ना केवल लोगों के बीच जागरूकता फैलाई जा रही है बल्कि सरकारी संस्थानों में प्रसव कराने वाली महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया जाता है. बावजूद लोग अपनी नासमझी की वजह से महिला की जान खतरे में डाल देते है।

कुछ ऐसा ही मामला मारगोमुंडा थाना क्षेत्र के बेजाटांड़ गांव की रहने वाली 30 वर्षीय सरिता देवी के साथ हुआ। सरिता को आठ माह गर्भ था। अचानक हुए दर्द को लेकर स्वजनों ने घर में अप्रशिक्षित दाई से प्रसव करा दिया। महिला ने एक पुत्र को जन्म दिया।

इसके कुछ देर बाद ही महिला की हालत बिगड़ने लगी। आनन-फानन में स्वजन उसे लेकर देवघर सदर अस्पताल लेकर आए। यहां पहुंचने पर ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने जांच के उपरांत मृत घोषित कर दिया।
बताया जाता है घर से देवघर लाने के क्रम में महिला की मौत रास्ते में ही हो गई थी। मृत महिला को एक 10 साल का पुत्र व एक सात साल की पुत्री भी है।
घटना को लेकर मृत महिला की मां पाथरोल थाना क्षेत्र के सिमरातरी गांव निवासी सुमन देवी का कहना है कि पट्टाजोरी की रहने वाली एक महिला को बुलाकर प्रसव कराए जाने की बजाय समय रहते अस्पताल ले जाया गया होता तो शायद उसकी पुत्री की जान बचाई जा सकती थी।



