
Ranchi: आम जनता को कानून न तोड़ने की नसीहत देने वाले प्रशासनिक अधिकारी खुद गैर कानूनी कार्य करने की ओर चल पड़े हैं। कुछ दिनों पहले ही ये खबर आई कि आईएएस राजीव रंजन ने अपने एक ही बच्चे का तीन जन्म प्रमाण पत्र बनाया है। पासपोर्ट कार्यालय और नगर निगम के बीच इसे लेकर पत्राचार हुआ। खबर आग की तरह फैली तो झारखंड सरकार के योजना एवं विकास विभाग को आकर सफाई देनी पड़ी और कहा गया कि सुधार कर लिया गया है। लेकिन, इस बार जो मामला आया है, वो ऐसे अधिकारी का है जिसपर पूरे रांची नगर निगम क्षेत्र में जन्मे बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनाने का जिम्मा है।

अब साहब ने अपने ही बेटे के दो-दो सर्टिफिकेट बनवा रखे हैं। वो भी तब जब इनके पास रामगढ़ जिला संभालने की जिम्मेदारी थी।

जब पिता बने तब साहेबगंज डीसी थे।बर्थ सर्टिफिकेट में पता रामगढ़ डीसी आवास का है।
आईएएस अधिकारी संदीप सिंह के बेटे के जन्म प्रमाण पत्रों की माने तो उसका पहला जन्म 17 मई 2019 को रामगढ़ डीसी आवास में हुआ। ठीक 17 दिनों के बाद यानी तीन जून 2019 को संदीप सिंह एक बार फिर से पिता बने। पहला जन्म प्रमाण पत्र नगर परिषद रामगढ़ की तरफ से 11.06.2021 को निर्गत किया गया और दूसरा 2412.2019 को निर्गत किया गया। जबकि इन सबके बीच सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों जन्म प्रमाण पत्र में दी गयी जन्म तिथि के दिन आईएएस संदीप सिंह साहेबगंज के डीसी थे।
जबकि जन्म प्रमाण पत्र पर बताया गया पता रामगढ़ डीसी आवास का है। मतलब साहेबगंज के डीसी रहते संदीप सिंह के बेटे का 17 दिनों के अंदर दो बार जन्म होता है और वो भी रामगढ़ डीसी के आवास पर। ऐसा होना असंभव है।
लेकिन झारखंड की ब्यरोक्रैसी जग जाहिर है और यहां सबकुछ संभव है।
अब बर्थ सर्टिफिकेट ने कई सवाल भी जन्म दिए हैं। पहला सवाल की क्या अब भी घर में जन्मते हैं बच्चे ? वो भी आईएएस अधिकारी के? इससे पहले अईएएस राजीव रंजन के बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र में बच्चे के जन्म लेने का पता आवास ही था। अब संदीप सिंह के बच्चे के दोनों जन्म प्रमाण पत्र की माने तो उनके भी बच्चे का जन्म आवास पर ही हुआ है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या आज भी आईएएस अधिकारियों के बच्चे घर पर ही जन्म ले रहे हैं। दूसरा सवाल कि क्या आज भी दाई की मदद से नवजात को जन्म दिया जा रहा है?
और सबसे बड़ा सवाल कि ऐसी कौन सी जरूरत पड़ती है कि आईएएस रैंक के अधिकारी भी अपने बच्चों को गलत प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं। आखिर क्यों नहीं ट्रेजरी से इनके मेडिकल बिल निकाले जाएं और उसकी जांच हो। क्योंकि जब जन्म प्रमाण पत्र निर्गत करने वाले अधिकारी ही ऐसा करेंगे तो आम जनता से आप क्या उम्मीद करेंगे?



