
Deoghar: विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योर्तिलिंग बाबा बैद्यनाथ के शिवलिंग और अरघा से छेड़छाड़ मामले में 24 घंटे के अंदर देवघर डीसी विशाल सागर ने कार्रवाई की है।

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी विशाल सागर ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से मिली बाबा मंदिर के गर्भगृह में किए गए कार्यो से जुड़े मामले की जानकारी को गंभीरता से संज्ञान लेते हुए मंदिर प्रभारी सह अनुमंडल पदाधिकारी, देवघर को चौबीस घंटों के अंदर जांच कर प्रतिवेदन समर्पित करने का निर्देश दिया था।

जिसके बाद मंदिर प्रभारी सह अनुमंडल पदाधिकारी के समर्पित जांच प्रतिवेदन के आधार पर मंदिर कर्मी हरि लाल पांडेय को निलंबित कर दिया गया है।
साथ ही मुख्य मंदिर प्रबंधक रमेश परिहस्त की सभी प्रकार की वित्तिय और प्रशासनिक शक्तियों को तत्काल प्रभाव से विलोपित कर दिया गया है।
बता दें कि गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने भी एक दिन पहले अपने सोशल मीडिया X अकाउंट पर एक तस्वीर साझा की थी। इसमें नजर आ रहा है कि शिवलिंग और अरघा के आसपास सीमेंट का लेप जैसा कुछ लगा है।
इस तस्वीर ने इलाके में बवाल मचा दिया।
सांसद ने लिखा- द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ तथा 51 शक्तिपीठों में से एक हृदय पीठ देवघर में झारखंड सरकार का यह अनर्थ, शिवलिंग पर सीमेंट धार्मिक आस्था पर कांग्रेस सरकार का सीधा प्रहार है।
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ तथा 51 शक्तिपीठों में से एक ह्रदय पीठ देवघर में झारखंड सरकार का यह अनर्थ,शिव लिंग पर सीमेंट धार्मिक आस्था पर कॉंग्रेस सरकार का सीधा प्रहार है ।भगवान शिव के घर में अनर्थ,बाबा न्याय करेंगे pic.twitter.com/eLifZgserL
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) December 8, 2024
मामले का संज्ञान लेते हुए देवघर डीसी ने जांच के आदेश दे दिए थे।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, शनिवार को बाबा मंदिर के गर्भ गृह में विशेष सफाई की बात कहकर परिसर में सूचना फैलाकर दोपहर तीन बजे ही मंदिर का पट बंद कर दिया गया। उसके बाद मंदिर का पट श्रृंगार पूजा के दौरान खोला गया और पूजा की गई। जब दोबारा रविवार को मंदिर का पट खोला गया तो शिवलिंग का रूप बदला हुआ था। इसके ऊपर सीमेंट जैसी चीज लगी थी। आरोप है कि बाबा मंदिर को बंद कर सफाई के नाम पर शिवलिंग पर किसी चीज का लेप लगाया गया तथा गर्भगृह में टूटे हुए कुछ टाइल्स बदले गए।
पुरोहितों का कहना है कि कोर्ट के निर्देश के अनुसार मंदिरों के गर्भगृह में किसी तरह का काम करने से पहले मंदिर प्रशासन को पुरोहित समाज तथा सरदार पंडा की स्वीकृति लेना अनिवार्य है।
इस बावत पंडा धर्मरक्षिणी सभा के उपाध्यक्ष चंद्रशेखर खवाड़े ने बताया- मंदिर में प्रशासन धार्मिक भावनाओं को हताहत करते हुए आम जनमानस को बिना कुछ बताएं पौराणिकता और धार्मिक मान्यताओं के विपरीत काम कर रही है। सभा इसका विरोध करती है। ऐसे कुकृत्यों की निंदा करती है। बाबा बैद्यनाथ के शिवलिंग के अगल-बगल में छेड़छाड़ किया गया, जिसे बिना किसी सूचना के चोरी छुपे किया गया। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण और धर्म विरोधी कृत्य है।


