
Deoghar: सावन का महीना 4 जुलाई से शुरू हो चुका है। देवघर में बाबा भोलेनाथ के भक्तों की भीड़ लग रही है। सभी भक्त बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने धीरे-धीरे पहुंच रहे हैं। देवघर के शिवलिंग को मनोकामना लिंग भी कहते हैं। सभी श्रद्धालु अपनी-अपनी मनोकामना लेकर सुल्तानगंज से जल भरकर 105 किमी पैदल यात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच रहे हैं। इन दिनों यात्रा में कई तरह की अनोखी कांवड़ देखने को मिल रही हैं।

इसी कड़ी में 54 फ़ीट लम्बा कांवर लेकर कांवरियो का जत्था देवघर पहुंचा है। पटना सिटी चौक शिकारपुर स्थित दुर्गा मंदिर से कावड़िया संघ ने यह कांवड़ यात्रा शुरू की है। इस कांवड़ यात्रा में करीब 300 भक्त शामिल हैं, जिसमें 50 महिला भी हैं। बता दें कि यह जत्था पिछले रविवार को सुल्तानगंज से जल भरकर देवघर के लिए रवाना हुआ था। यह जत्था बुधवार की अहले सुबह करीब साढ़े तीन बजे देवघर पहुंचा है।

मिली जानकारी के मुताबिक, यह कांवड़ यात्रा 2007 से ही चला आ रहा है। इस यात्रा में कांवड़ की लंबाई करीब 54 फीट होती है, जो भक्त सुल्तानगंज से देवघर तक पैदल यात्रा करके पहुंचते हैं। अगर कांवड़ के वजन की बात करें तो करीब 5 क्विंटल है। कहा जाता है कि जब भक्त कांवड़ लेकर चलते हैं, तो यह संकल्प लेकर चलते हैं कि 54 फीट का कांवड़ 54 घंटे में बाबा के धाम पहुंच जाना है।
ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का गठबंधन 54 फीट का होता है और उनके बीच की दूरी भी 54 फीट ही है। इसलिए कांवड़ियां 54 फीट का कांवड़ यात्रा निकालते हैं।
कांवरियों ने बताया कि जो भी भक्त रास्ते में इस कांवड़ को कंधा देते हैं, उनकी सारी मनोकामना पूर्ण हो जाती है। इसलिए रास्ते में कांवड़ को कंधा देने के लिए भक्तों में होड़ मची होती है।


