
Deoghar: दो साल बाद देवों के देव महादेव की नगरी में महाशिवरात्रि पर शिवबारात धूमधाम से निकाले जाने की तैयारी हो रही है। एक ओर जहां शिवबारात के आयोजन को लेकर भोलेनाथ के भक्तों में उत्साह है तो वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन और शिवबारात आयोजन समिति के बीच सामंजस्य नहीं बनता दिख रहा।

जानकारी हो कि इस बार शिवबारात के आयोजन की जिम्मेदारी गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने ली है। ऐसे में नई आयोजन समिति द्वारा इसे आकर्षक बनाने के लिये तमाम तैयारियां की जा रही है। लेकिन, शिवबारात की तैयारी को लेकर जिला प्रशासन बार बार नियमों की जानकारी और चेतावनी दे रहा है। सबसे पहले तो सांसद द्वारा इस बार शिवबारात के नए रुट का ऐलान किया गया था जिसे जिला प्रशासन ने सिरे से नकार दिया और आदेश पारित किया गया शिवबारात नए नहीं पुराने रुट से ही निकलेगी।

अब शनिवार को दो और आदेश जारी किया गया है। जिसमें शिव बारात में शामिल होने वाले हाथियों और जगह-जगह बन रहे तोरण द्वार को लेकर है।आदेश में कहा गया है कि नगर निगम क्षेत्र के महत्वपूर्ण पथों/मार्ग में तोरण द्वार का अधिष्ठापन किये जाने की सूचना एंव संभवना है, जिसके कारण आवागमन, यातायात, ट्रैफिक एवं विधिव्यवस्था इत्यादि में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। ऐसे में सक्षम प्राधिकार से बिना अनुमति प्राप्त किये तोरण द्वार का अधिष्ठापन/निर्माण अवैधानिक माना जायेगा।
अनुरोध किया गया है कि विधि-व्यवस्था/शिवबारात/शिवरात्रि इत्यादि में सुरक्षा के दृष्टिकोण से तोरण द्वार के अधिष्ठापन से पूर्व अनुमण्डल पदाधिकारी, देवघर से अनापत्ति/सहमति प्राप्त करना सुनिश्चित करेगें तथा अधिष्ठापन से पूर्व नगर निगम कार्यालय, देवघर को सूचित करेंगें। अन्यथा नगरपालिका अधिनियम 2011 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जायेगी।
दूसरा आदेश वन प्रमंडल द्वारा जारी किया गया है। वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा जानकारी दी गई है कि शिव बारात में हाथी, ऊँट, घोड़ा इत्यादि पशुओं को बारात में शामिल किया जाना संभावित है। ऐसे में सूचित किया जाना है कि हाथी वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के अनुसूची-1 के वन्य जीव है, जिसे सक्षम प्राधिकार (मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक) के द्वारा उक्त अधिनियम के धारा 42 के तहत् प्रदत्त स्वामित्व प्रमाण पत्र के आधार पर ही रखा जा सकता है तथा धारा 43(1) के अनुसार उसका किसी व्यवसायिक प्रकृति का उपयोग वर्जित है। उक्त प्रावधानों का उल्लंघन उक्त अधिनियम के धारा 51 के तहत दण्डनीय है। अतएव सभी आम एवं खास जनों से वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानुकुल व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
इधर, सांसद निशिकांत दुबे के सोशल मीडिया पर डाले जा रहे पोस्ट भी ये बताने के लिए काफी है कि शिवबारात को लेकर आयोजन समिति और जिला प्रशासन के बीच तालमेल उथल-पुथल या यूं कह लें कि टकराव की स्थिति वाला नजर आ रहा है।
वैसे बता दें कि ये तमाम प्रावधान जो इस साल जिला प्रशासन द्वारा सख्ती से पालन कराने की कवायद शुरू की गई है वो सालों पहले से कानूनी रूप से लागू है। लेकिन, इन प्रावधानों को नजर अंदाज कर दो साल पहले तक तमाम हाथी घोड़े और ऊंट शिवबारात में शामिल हुए हैं। ऐसे में सवाल ये उठ रहे कि क्या तब ईन कानूनों और प्रावधानों की जानकारी उस वक़्त के अधिकारियों को नहीं थी।



