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आंगनबाड़ी पोषाहार आपूर्ति में घपला!: MP निशिकांत की CBI जाँच की मांग पर खलबली, विभाग हुआ रेस, जानें पूरा मामला….

New Delhi: 14 मार्च 2022 को गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति जुबीन ईरानी को पत्र लिख कर झारखंड में आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार आपूर्ति में बड़े पैमाने पर हो रहे घपले की सीबीआइ जांच की मांग की थी। खासकर, झारखंड के गोड्डा, दुमका और देवघर जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन बेहतर नहीं होने की बात डॉ. निशिकांत ने कही थी। जिसके बाद महिला एवं बाल विकास द्वारा विभागीय सचिव को पत्र लिख झारखंड में पूरक पोषाहार कार्यक्रम की वस्तुस्थिति पर रिपोर्ट मांगा गया था।

राज्य सरकार के प्रधान सचिव द्वारा मंत्रालय को जवाब में रिपोर्ट मिलते ही मंत्री स्मृति जुबीन ईरानी ने सांसद निशिकांत दुबे को पत्र भेज गोड्डा, दुमका और देवघर जिलों में आंगनबाड़ी सेवाओं के कार्यान्वयन से संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डाला।

झारखंड सरकार की ओर से भेजा गया जवाब

मंत्रालय द्वारा झारखंड सरकार से मांगे गए जवाब में 18 जुलाई 2022 को राज्य सरकार के प्रधान सचिव ने मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपते हुए राज्य के पूरक पोषाहार कार्यक्रम की वस्तुस्थिति से अवगत कराया। ये बताया गया कि विभिन्न कार्यक्रम निर्धारित मानकों के अनुरूप चल रहा है। साथ ही राज्य के तीन जिलों गोड्डा, दुमका और देवघर में आँगनबाड़ी योजनाओं के कार्यान्वयन संबंधी उठाये गए आपत्तियों पर पर कहा गया है कि इन जिलों के उपायुक्तों से आंगनबाड़ी योजना की समीक्षा और आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण कर समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। आपत्तियों के निराकरण के संदर्भ में जल्द ही वस्तुस्थिति मंत्रालय को अवगत कराया जायेगा। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों के वास्तविक लाभुकों के बीच पूरक पोषाहार सामग्रियों के वितरण और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विभिन्न क्षेत्र के पदाधिकारियों को SOP गठित कर योजना कार्यान्वयन का स्पष्ट निर्देश दिया गया है।

सांसद निशिकांत ने उठाये थे सवाल

यहां बता दें कि 14 मार्च 2022 को सांसद निशिकांत दुबे ने मंत्री स्मृति ईरानी को सौंपे पत्र में कहा था कि देश भर में वंचित और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के विकास और पोषण में आंगनाबड़ी कार्यक्रम महत्वपूर्ण कारक है। मौजूदा एनडीए सरकार ने आइसीडीएस योजना में कई बदलाव भी किए हैं। पूरे देश में इसमें सुधार दिख रहा है, लेकिन झारखंड में स्थिति बदतर है। कहा कि झारखंड के गोड्डा, दुमका और देवघर जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन बेहतर नहीं हो रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों को पोषक तत्वों से भरपूर पोषाहार की आपूर्ति करने वाले स्वयं सहायता समूहों को राजनीतिक और नौकरशाही वर्ग ने सिंडिकेट बनाकर भ्रष्टाचार में शामिल कर लिया है। बिना किसी निगरानी के पोषाहार आपूर्ति की जा रही है। इसमें करोड़ों रुपये की बंदरबांट हो रही है। कई स्थानों पर आंगनबाड़ी केंद्रों के बंद रहने की लगातार शिकायतें मिलती है। केंद्रों में पोषाहार आपूर्ति में सक्षम अधिकारी नियंत्रित कर नहीं कर पाते हैं। ऐसे में भोजन की रुग्णता से यहां कुपोषण का ग्राफ कम नहीं हो रहा है। इसका बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। वर्तमान में सिंडिकेटों के साथ एक भ्रष्ट व्यवस्था विकसित कर राज्य सरकार की एजेंसियां केंद्रीय सहायता से चलने वाली बाल विकास परियोजना को दुधारू गाय की तरह केवल उपयोग कर ही है। इसकी सीबीआइ जांच से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों और हितों की रक्षा होगी।

मंत्री स्मृति ने एमपी निशिकांत को भेजा पत्र

मंत्री स्मृति जुबीन ईरानी ने सांसद निशिकांत दुबे को पत्र भेज कहा है योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे, इसके लिए मंत्रालय ने पहले ही सभी राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र जारी कर दिया है। जिसके तहत लाभार्थियों के आधार सीडिंग को जल्द से जल्द पोशन ट्रैकर में अद्यतन करने की प्रक्रिया को पूरा करने का अनुरोध किया गया है। साथ ही बताया गया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान मंत्रालय द्वारा आंगनबाडी सेवाओं के तहत विभिन्न गतिविधियों को लागू करने के लिए 433.56 करोड़ रुपये (2019-2020), 457.85 करोड़ (2020-21) और 352.98 करोड़ रुपये (2021-22) झारखंड सरकार को धन जारी किया गया है।

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