
DEOGHAR: एक मामले में जिले के सारठ थाना क्षेत्र के रहने वाले पिता- पुत्र को देवघर कोर्ट से पांच साल पांच महीने बाद न्याय मिला. देवघर कोर्ट में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विजय कुमार श्रीवास्तव ix की अदालत ने कांड दर्ज होने के लगभग पांच साल पांच महीने बाद सत्र वाद संख्या 159/2017 के दो अभियुक्त ग्राम चरकमारा, थाना सारठ के दो गोलू रजवार एवं उसके पिता मांछू रजवार को अभियोजन द्वारा प्रस्तुत कुल सात गवाहों धीरेन्द्र रजवार, मृतक नीलम देवी की मां गौरी देवी ,रोहित यादव ,भोला महतो,पोस्ट मार्टम करने वाले डाक्टर सुनिल कुमार सिंह सारवां थाना कांड संख्या 0029/2017 धारा 302,201,376,34 भा•द•वि• के सूचक ग्राम कोरडीहा थाना सारवां के चौकीदार महेश प्रसाद यादव और अनुसंधानकर्ता पुलिस अवर निरीक्षक राम सोहावन राम की गवाही तथा अभियोजन की ओर से अंकित कराये गये कुल आठ प्रदर्श एवं बचाव पक्ष की ओर से अंकित कराये गये दो प्रदर्शों पर विचारण के बाद अभियोजन पक्ष की ओर से विद्वान अपर लोक अभियोजक शिव लाल मण्डल तथा बचाव पक्ष की ओर से विद्वान वरीय अधिवक्ता अशोक राय की बहस सुनने के बाद दोनों विचाराधीन अभियुक्त गण गोलू रजवार और उसके पिता माछू रजवार को रिहाई का आदेश सुनाया है ।

घटना सारवां थानान्तर्गत बलियाचौकी जंगल में दिनांक 14 फरवरी 2017 को एक अज्ञात महिला की अधजली लाश मिली थी जिसपर चौकीदार के बयान पर यह केस अज्ञात अभियुक्त गण के विरूद्ध दर्ज हुआ था लेकिन उधर सारठ थानान्तर्गत ग्राम चरकमारा के गोलू रजवार की पत्नी निलम देवी उम्र 19 वर्ष के लापता होने का संहार नम्बर 18/2017 दिनांक 11फरवरी 2017 को निलम देवी का माता गौरी देवी पति मुरली रजवार ग्राम कांकी थाना पालोजोरी जिनका नैहर ग्राम नया खरना है उन्होंने निलम देवी के लापता होने की सूचना दर्ज करायी थी जिसकी जांच तत्कालीन थाना प्रभारी सारठ थाना नुनदेव राय पु•अ•नि• ने उमेश पासवान स•अ•नि• को सौंपा था.

सनद रहे इसी बीच सारवां के बलियाचौकी जंगल में मिली अज्ञात लाश को गौरी देवी ने गलत पहचान कर लिया कि ये उनकी बेटी और चरकमारा के गोलू रजवार की पत्नी निलम देवी की ही लाश है ।
इसी बीच नाटकीय ढंग से सारठ के तत्कालीन थाना प्रभारी नुनदेव राय द्वारा बिना उचित साक्ष्य और अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर क गोलू रजवार और माछू रजवार को गिरफ्तार कर न्यायालय में भेज दिया जबकि वे न तो सारवां थाना कांड संख्या 20/2017 के अनुसंधानकर्ता न सारवां थानान्तर्गत पदस्थापित थे और वे दोनों अभियुक्त गण 14 फरवरी 2017 से 31 जनवरी 2020 तक लगभग तीन वर्ष जेल में रह गए ।
लेकिन, सारठ थानान्तर्गत ग्राम करमा में एक और महिला की लाश मिली जिसे लेकर सारठ थाना कांड संख्या 17/2017 एवं चरकमारा के ग्रामीणों के पहचानने चौकीदार पंचानन महरा के बयान पर तत्कालीन थाना प्रभारी उसी नुनुदेव राय ने दर्ज किया जिसमें बताया गया कि गायब निलम देवी की यही लाश है ।
उल्लेखनीय है कि झारखंड उच्च न्यायालय से दोनों की नियमित जमानत याचक B.A.No-6121 2017 में ही खारिज होने के बाद भी अधिवक्ता ने हार नहीं मानी और दोनों लाशों के DNA परीक्षण की मांग और जमानत हेतु पुनः झारखंड उच्च न्यायालय से गुहार लगायी तब B.A.No-5131 / 2019 में झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रंजन मुखोपाध्याय की खंडपीठ ने देवघर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश देकर दोनों लाश का DNA TEST कराया. फलतः दूध का दूध और पानी का पानी कहावत चरितार्थ हूई और ये बात प्रकाश में आई कि सारवां वाली लाश नीलम की नहीं थी और झारखंड उच्च न्यायालय ने दोनों को 31जनवरी 2020 को जमानत दी और आज ADJ 9 की कोर्ट से दोनों को लंबे संघर्ष के बाद न्यायालय से न्याय मिला है ।



