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Jharkhand में Mob Lynching की घटनाओं में पीड़ितों को जल्द इंसाफ के लिए Fast Track Court बनायेगी सरकार

झारखंड सरकार राज्य में मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) की घटनाओं से जुड़े मुकदमों में पीड़ितों को जल्द इंसाफ दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) का गठन करने पर विचार कर रही है।

Ranchi: झारखंड सरकार राज्य में मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) की घटनाओं से जुड़े मुकदमों में पीड़ितों को जल्द इंसाफ दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) का गठन करने पर विचार कर रही है। संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सीपीआई एमएल के विधायक विनोद सिंह द्वारा पूछे गये एक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी।

सरकार की ओर से लिखित जवाब में बताया गया है कि झारखंड में साल 2016 से लेकर अब तक मॉब लिंचिंग की लगभग 46 घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं में आरोपी करीब 51 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है और पीड़ितों के मुआवजे के तौर पर 19 लाख 90 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया है। संसदीय कार्य मंत्री ने सदन को बताया कि मॉब लिंचिंग मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्टका गठन करने पर सरकार विचार कर रही है।

विधानसभा में अल्पकाल के दौरान विधायक विनोद सिंह ने सदन में अल्पकाल के दौरान सदन में यह मामला उठाते हुए कहा कि झारखंड में वर्ष 2016 से लेकर 2021 तक मॉब लिंचिंग की करीब 58 घटनाओं को अंजाम दिया गया। हाल में हजारीबाग के करियातपुर में रूपेश पांडेय और बगोदर के खतको में सुनील पासी की मॉब लिंचिंग में हत्या कर दी गई। विधायक ने कहा कि इन मामलों में अभी तक किसी को सजा नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मॉब लिंचिंग के कई पीड़ितों को सहयोग राशि भी मुहैया नहीं कराई गई है।

बता दें कि झारखंड विधानसभा ने बीते शीतकालीन सत्र में एंटी मॉब लिंचिंग विधेयक भी पारित किया था। बीते21 दिसंबर को पारित यह विधेयक अब तक कानून का रूप नहीं ले सका है। विधेयक पर राज्यपाल की मंजूरी अभी बाकी है। राजभवन इसका अध्ययन कर रहा है। बताया जा रहा है कि राज्यपाल इस पर विधिक राय लेंगे। इसके बाद ही इसे स्वीकृति देने पर फैसला लिया जाएगा। इस विधेयक के प्रावधानों के अनुसार मॉब लिंचिंग में शामिल लोगों और साजिश रचने वालों को अधिकतम आजीवन कारावास तक की सजा होगी। इस विधेयक में जुमार्ने के साथ संपत्ति की कुर्की और तीन साल से आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।

अगर मॉब लिंचिंग में किसी की मौत हो जाती है तो दोषी को आजीवन कारावास तक की सजा होगी। गंभीर चोट आने पर 10 साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। उकसाने वालों को भी दोषी माना जाएगा और उन्हें तीन साल की सजा होगी। अपराध से जुड़े किसी साक्ष्य को नष्ट करने वालों को भी अपराधी माना जाएगा। साथ ही पीड़ित परिवार को मुआवजा व पीड़ित के मुफ्त इलाज की व्यवस्था है।

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