
Deoghar:- बीते दिनों लड़कियों के लिए शादी की उम्र को 18 साल से बढ़ा कर 21 साल किए जाने के प्रस्ताव पर केंद्रीय कैबिनेट ने अपनी मुहर दी है। अब से कानूनी ज़ामा पहनाने के लिए इसे सदन में पेश किया जाएगा। एक तरफ इस नए कानून पर ज्यादर लोगों ने सहमति जताई है तो, कई मुस्लिम संगठनों और नेताओं ने अपने निजी तर्को के साथ इस प्रस्ताव पर विरोध भी जताया है।

उन्हीं में से एक हैं झारखंड सरकार में मंत्री और मधुपर विधानसभा सीट से JMM विधायक हफ़िज़ूल हसन, जिन्होंने केंद्र सरकार के उम्र बढ़ाने वाले फैसले पर सवाल खड़े करते हुए लड़कियों के लिए शादी की उम्र 18 से भी घटा कर 16 साल किए जाने की वकालत की है।

लेकिन, मंत्री महोदय यह भूल गए कि, वह जिस राज्य के मंत्री हैं और इलाके की नुमाइंदगी करते हैं वहां आज भी लड़कियों की शादी को लेकर उम्र तय नहीं की जाती। हेमंत सरकार के कबीना मंत्री हफ़िज़ूल हसन के इस बयान को विपक्ष न सिर्फ बे-फज़ूल करार दे रहा है बल्कि, अब आदिवासी समाज की लड़कियों ने भी मुखर होकर एक सुर में मंत्री के बयान पर विरोध दर्ज कराया है।
कई लड़कियों ने मंत्री के बयान को मौलिक अधिकार का हनन बताया है तो, कुछ ने मंत्री हफ़िज़ूल को लड़कियों की तरक्की के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा करार दिया है। शादी की उम्र बढ़ने को लेकर केंद्र के फैसले का समर्थन करते हुए बालिकाओं ने कहा कि, लड़कियों की उम्र में अगर कानूनन बढ़ोतरी की जाएगी तो लड़कियों को भी आगे बढ़ने का भरपूर मौका मिल सकेगा।
मौजूदा कानून और सामाजिक बंधन के बीच फिलहाल लड़कियों को कम उम्र में ही शादी के बंधन में बांध दिया जाता है और उनकी तरक्की के सारे रास्ते बंद कर दिए जाते हैं, ऐसे में केंद्र सरकार की तरफ से उम्र बढ़ने के फैसले का वह स्वागत करती हैं।
दरअसल, एक वैश्विक सहमति है कि महिलाओं के लिए शादी की कानूनी उम्र 18 साल होना चाहिए. सरकार को लगता है कि 21 वर्ष की आयु बढ़ाने से मातृत्व की आयु बढ़ेगी, प्रजनन दर कम होगी और माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा.


