
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने कोरोना काल की शुरुआत से अब तक 37172 मामलों को सुनवाई के बाद निष्पादित कर दिया है। दूसरी ओर लगभग 5367 इंटरलॉकेटरी एप्लिकेशन को भी हाईकोर्ट की ओर से निष्पादित किया गया है। यही नहीं, झारखंड हाईकोर्ट के सभी जजों ने अब तक 119253 मुकदमों को सूचीबद्ध कर वीसी के जरिये उनकी सुनवाई की है।

राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने मंगलवार को कहा कि कोरोना काल में हाईकोर्ट की ओर से मुकदमों की सुनवाई एवं निष्पादन के आंकड़ों का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि निश्चित तौर पर ये आंकड़े काफी बेहतर हैं। इसमें न्यायिक व्यवस्था के साथ झारखंड हाईकोर्ट के वकीलों, विशेषकर उन अधिवक्ताओं का अहम रोल है। जिन्होंने अपने पक्षकारों के लिए न्यायालय के समक्ष बहस की। उन्होंने कहा कि केस निष्पादन में बार के वकीलों के साथ महाधिवक्ता कार्यालय के उन अधिवक्ताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है, जिन्होंने छुट्टी के दिनों में भी न्यायिक कार्यों में हिस्सा लिया।

झारखंड स्टेट बार कौंसिल (jharkhand state bar council) के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्ण ने कहा है कि कोरोना की पहली और दूसरी लहर की भयावहता के बीच हाईकोर्ट न्यायाधीशों ने रिकॉर्ड मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कर एक मिसाल पेश की है। कोरोना के संक्रमण के न्यायिक प्रक्रिया का बाधित न होना झारखंड हाई कोर्ट के लिए एक अचीवमेंट है। इसका श्रेय राज्यभर के अधिवक्ताओं को भी जाता है।
उल्लेखनीय है कि झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन ने कोरोना की दोनों लहरों में लॉकडाउन के दौरान पूरी स्थिति पर पैनी नजर रखी। मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) ने हाई कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों के साथ कोर्ट स्टाफ्स को भी मोटिवेट किया ताकि किसी भी परिस्थिति में न्यायिक कार्य बाधित न हो। सभी जजों के प्रयास से कोरोना काल में भी अंतिम व्यक्ति तक न्याय की किरण बिना किसी रुकावट के पहुंचती रही और लॉकडाउन में भी न्यायिक कार्य में बाधा उत्पन्न नहीं हो पाया।


