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बंद कीजिये राजनीति, खोल दीजिये मंदिर: MP निशिकांत ने CM हेमंत को पत्र लिख की बैद्यनाथ और बासुकीनाथ मंदिर खोलने की मांग

गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने बाबा बैद्यनाथ मंदिर और बासुकीनाथ मंदिर खोले जाने की मांग झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से की है।

देवघर: गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे (MP Dr. Nishikant Dubey) ने बाबा बैद्यनाथ मंदिर (Baba Baidyanath Mandir) और बासुकीनाथ मंदिर (Basukinath Mandir) खोले जाने की मांग झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) से की है। सांसद डॉ. निशिकांत ने सीएम हेमंत को पत्र लिख इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है कि आखिर क्यों बाबा बैद्यनाथ और बासुकीनाथ का दरबार आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाना जरूरी है। उन्होंने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि दोनों मंदिरों पर प्रत्यक्ष रूप से एक करोड़ लोग आश्रित हैं, ऐसे में कोविड नियमों का पालन करते हुए आम भक्तों के लिए बाबा का दरबार खोला जाना चाहिए।

दोनों मंदिरों से जुड़ी है पांच करोड़ से ज्यादा लोगों की जीविका

हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में निशिकांत दुबे ने कहा है कि बाबा बैद्यनाथ और बासुकीनाथ मंदिर पर पांच करोड़ से ज्यादा लोगों की जीविका प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। जिसमें फूल-पत्ती बेचने वाले, दूध बेचने वाले, होटल, रेस्टोरेंट व्यवसाई, रिक्शा चलाने वाले, डेली वर्कर्स, मंदिर के आसपास के दूकान वाले आदि सहित अनेकों संगठित और गैर संगठित क्षेत्र से जुड़े लोग मंदिर बंद रहने से प्रभावित हुए हैं। जिनकी जीविका इन दोनों मंदिरों में सालों आने वाले छह करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं पर निर्भर है।

परेशान हैं मंदिर पर आश्रित लोग

सांसद ने लिखा है कि उनको इन दोनों मन्दिरों और इसके आसपास इलाकों में लोगों से मिलने और बातचीत करने का मौका मिला। जिसके बाद उनकी रोजमर्रा की परेशानी से वो अवगत हुए। उन्होंने लिखा है कि हेमंत सरकार ने अपनी जिद्द से जब कोरोना के पहले लहर के दौरान इन दोनों मंदिरों को बंद कर रखा था। तब उन्हें सुप्रीम कोर्ट के शरण में जाना पड़ा। जिसके बाद इन दोनों मंदिरों को खोला गया।

पहली लहर के दौरान भी आपने जिद्द में बंद रखा मंदिर: निशिकांत

डॉ. निशिकांत दुबे ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अप्रैल-मई 2020 में इन दोनों मंदिर को खोलने को लेकर हुए बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा है कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री से संथाल परगना के लोगों की जीविका का जुड़ाव इन दोनों मंदिरों से होने की बात कहते हुए निवेदन किया था, लेकिन मुख्यमंत्री ने सांसद के प्रति अपने गुस्से का इजहार करते हुए इन दोनों मंदिरों को खोलने से इंकार कर दिया था। जिसका नतीजा यह हुआ था कि अचानक से इन इलाकों के आसपास न सिर्फ अपराध बढ़े बल्कि चोरी के साथ-साथ निम्न आय वर्ग के परिवार के सदस्यों के द्वारा आत्महत्या करने की घटनाएं भी अचानक से बढ़ गयी थी।

कृपया अपने आवास से बाहर निकलिए और राज्य का दौरा कीजिये:-

डॉ. निशिकांत दुबे ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अपने पत्र में लिखा है कि आप कृपया अपने आवास से बाहर निकलिए, राज्य का दौरा कीजिये , तभी आपको इन इलाकों के लोगों के दर्द का अहसास होगा। पत्र में लिखा गया है कि इन इलाकों में बेरोजगारी इतनी बढ़ गयी है कि हर दिन सैंकड़ों की संख्या में आदिवासी साहेबगंज और पाकुड़ रेलवे स्टेशन पर काम की तलाश में राज्य से बाहर जाते हुए देखे जा सकते हैं।

पुरे देश में मंदिर और धार्मिक स्थलों को आम भक्तों के लिए खोल दिया गया है:-

डॉ. निशिकांत दुबे ने अपने पत्र के जरिये कहा है कि सबसे बड़ा मुद्दा उनलोगों के जान और जीविका को बचाना है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन दोनों मंदिरों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा है कि पुरे देश में मंदिर और धार्मिक स्थलों को आम भक्तों के लिए खोल दिया गया है। मसलन, तिरुपति, उज्जैन और तारापीठ जहां से आप हाल ही में सपरिवार दर्शन कर लौटें हैं।

मंदिर पर आश्रित निम्न आय वाले परिवार की जीविका को बचाएं:-

सांसद ने हेमंत सोरेन को सलाह दिया है कि स्पेसफिक मेजर्स को लेते हुए देवघर और बासुकीनाथ मंदिर को खोला जाए। जिसमें लोगों को कोविड के बचाव के साथ-साथ इन दोनों मंदिर पर आश्रित निम्न आय वाले परिवार की जीविका को बचाया जाए।

covid नियमों के साथ खोला जाए दोनों मंदिर:-

सांसद ने सुझाव दिया है कि इन दोनों मंदिरों को खोला जाये और ऑनलाइन टाइम स्लॉट के आधार पर सुबह पांच बजे से शाम बजे तक निर्धारित संख्या में भक्तों को दर्शन करने के लिए जाने दिया जाए। साथ ही भक्तों का प्रवेश से पहले बॉडी टेमरेचर मापा जाये , जबकि दूसरे जिले से आने वाले श्रद्धालुओं को नेगेटिव RTPCR रिपोर्ट लाना आवश्यक किया जाए।

मई 2020 में CM ने की थी राजनीती: MP

सांसद ने लिखा है कि जब वे मई 2020 में हेमंत सोरेन से मन्दिर खोलने का आग्रह किया था तो उनकी इस मांग पर गौर करने के बजाए मुख्यमंत्री ने राजनीति करते हुए और बिना सभी संबंधीत लोगो से राय लेते हुए मंदिर नहीं खोलने का फैसला किया था।

काश! आप इनसे संपर्क करते:-

निशिकांत लिखते हैं कि मुख्यमंत्री ने उनको नीचा दिखाने के मकसद से सिर्फ पंडा धर्मरक्षिणी सभा से कंसल्ट कर मंदिर को बंद रखा था। उन्होंने लिखा है कि इससे अच्छा होता कि आप (हेमंत सोरेन) चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स, होटल एसोसिएशन, रिक्शा और शॉप एसोसिएशन से संपर्क कर उनकी राय जानी होती। जिनकी जीविका इन दोनों मंदिरों पर आश्रित है। इतना ही नहीं आपने देवघर-बासुकीनाथ श्राइन बोर्ड के सदस्यों से भी सम्पर्क नहीं किया जिसके आप खुद चेयरमैन हैं। इतना ही नहीं, आपने स्थानीय MPs, MLAs, Mayor के साथ सभी चुने हुए जनप्रतिनिधियों से संपर्क नहीं साधा जिनसे आपको बेहतर सलाह मिल सकती थी। लेकिन आप पॉलिटिक्स प्ले करते हुए इन सभी को दरकिनार कर गए।

बंद कीजिये राजनीति, खोल दीजिये मंदिर:-

निशिकांत दुबे ने अंत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया है कि अब वे बाबा धाम पर राजनीती बंद कर एक जुलाई को समाप्त हो रहे स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह के बाद बैद्यनाथ और बासुकीनाथ मंदिर को खोल दें।

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