
गोड्डा: ECL के समूह महाप्रबंधक (उत्खनन) विद्यासागर गुप्ता ने सोमवार को राजमहल क्षेत्र का दौरा किया और परियोजना में हाल ही में आए विभिन्न प्रकार के नए मशीनों की गुणवत्ता एवं कार्य प्रणाली का निरीक्षण किया। उन्होंने परियोजना के महाप्रबंधक प्रभारी डीके नायक के साथ मुख्य कार्यशाला का अवलोकन किया एवं हाल ही में आए 190 टन क्षमता वाले डंपरों का जायजा लिया।

उन्होंने बीईएमएल द्वारा आपूर्ति किए गए नवीन सुरक्षा प्रणाली युक्त हाइड्रोलिक शोवेल मशीन एचएस 37 अंबर का विधिवत् शुभारंभ भी किया। यह मशीन पूर्व में कार्यरत सूर्या शावेल का स्थान लेगी। विद्यासागर गुप्ता एवं महाप्रबंधक प्रभारी डीके नायक ने बताया कि 10.2 क्यूबिक मीटर क्षमता वाले इस फ्रंट लोडिंग शोवेल मशीन से राजमहल परियोजना की मशीनी क्षमता में वृद्धि होगी।

उन्होंने बताया कि अगले चरण में यहां के सबसे बड़े मशीन रॉप सॉवेल को भी नए मशीनों से परिवर्तित किया जाएगा। मौके पर उपस्थित क्षेत्रीय महाप्रबंधक उत्खनन पीके राय ने बताया कि धीरे-धीरे राजमहल परियोजना की सभी मशीनें नवीनीकृत कर दी जाएगी, ताकि नए उत्पादन लक्ष्य को पूरा करने में मशीनों की कार्यक्षमता से कोई असर ना पड़े। इस मौके पर महाप्रबंधक परिचालन ओ पी चौबे के साथ उत्खनन विभाग के वरीय अभियंताओं में अभय ठाकुर, समीर कुमार, हरेराम कुमार, एस एन महापात्र, पीके तिवारी, एस एन पी सिंह, चंदन भारती के साथ-साथ सीटू के वरीय नेता डॉ राधेश्याम चौधरी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
नई मशीन में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
एचएस 37 अंबर में निर्माता कंपनी ने मेक इन इंडिया के तहत पहली बार नई सेफ्टी टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया है। डबल इंजन एवं दो पीटीओ वाली इस सावेल मशीन में ऑपरेटर के कार्यप्रणाली के ऊपर सेंसिंग करते हुए किसी भी प्रकार से सोने या शराब आदि के नशे में रहने पर अलार्म बजने की प्रणाली का उपयोग किया गया है जो रात्रि में और भी ज्यादा कारगर होने की उम्मीद है। हाइड्रोलिक सावेल सेक्शन इंचार्ज हरेराम कुमार एवं इंजीनियर चंदन भारती ने बताया कि बीई1800 एसडी सावेल मशीन में कई नए फीचर्स मौजूद हैं जिसका आकलन इसके संचालन के पश्चात ही किया जा सकेगा।



