
Deoghar: एक लंबे अवधि के बाद झारखंड में नगर निकाय की चुनाव सम्पन्न हुई। देवघर में भी जीते हुए मेयर, उपमेयर और वार्ड के पार्षदों ने शपथ ले लिया और लगे हाँथ एक छोटी अंतराल के बाद बोर्ड की भी एक बैठक सम्पन्न हो गई। लेकिन, शहर की साफ सफाई सिर्फ चुनावी शोर बन कर ही रह गयी है, निगम क्षेत्र की वर्तमान स्थिति से यही प्रतीत हो रहा है।

गंदगी का आलम कम नहीं हो रहा है। निगम के कई इलाकों में अभी भी सड़क किनारे लगे डस्टबिन के बाहर कचरा पड़ा मिलेगा।

सारठ-देवघर मुख्यमार्ग पर अंबेडकर कॉलोनी के निकट अम्बे गार्डन मोड़ के समीप नाले से कचड़ा उठाकर उसे सड़क के किनारे ही छोड़ दिया गया है,जिसके कारण निकलने वाली दुर्गंध से स्थानीय सहित आवागमन करने वाले लोगों के लिए नागवार गुजर रहा है।

वहीं मौके पर एक दुकानदार विजय कुमार ने कहा कि कभी भी सफ़ाई कर्मी पूरी तरह से साफ सफाई नहीं करता है,एक तो बहुत दिनों पर आता है और काम भी अधूरा छोड़ कर चला जाता है। इस गंदगी और इससे निकलने वाली दुर्गंध से सभी परेशान हैं, इसके कारण दुकान में ग्राहक नहीं पहुंचते हैं।
वहीं थोड़ी दूर आगे बढ़ने के बाद फिर उसी तरह सड़क किनारे कूड़ेदान के निकट गंदगी का अंबार लगा हुआ है जहां अब तक निगम के हाकिम की नजर नहीं पड़ी है?

वहीं बावन बीघा माँ ललिता हॉस्पिटल वाली सड़क और मुहल्ले में महीनों तक सफ़ाई की गाड़ी नहीं पहुंचती है,निगम के सफ़ाई इंचार्ज को फोन करने पर समय दे दिया जाता है या फिर कहा जाता है उधर गाड़ी एजेंसी की जाएगी?
आखिरकार, निगम वासी हजारों रुपये निगम को टैक्स के रूप में देते हैं और बदले में सफाई की जगह बहाने और तारीख मिलती है।
पहले तो निकाय चुनाव नहीं हुई थी, तो वह एक बहाना था, पर अब तो चुनाव भी हो गई। निगम की सरकार भी तैयार हो चुकी है। लेकिन, जनता को वोट के बदले मिल रही है बदहाली। सवाल उठ रहा कि आखिर कब सुधरेगी नगर निगम की कार्यशैली। जनता परेशान हैं, हाकिम और नेताजी सब मस्ती में झूम रहें हैं। पैसा निगम की जनता का और सेवा के नाम पर सिर्फ़ बहानेबाजी।
वहीं स्थानीय निवासी रणजीत कुमार, बबलू कुमार, आशा देवी ,सुभम कुमार, पापुन, सुनील आदि ने कहा कि देवघर एक तीर्थ स्थल है,यहां के निगम की व्यवस्था उच्चस्तरीय होनी चाहिए। लेकिन देवघर निगम क्षेत्र को देखने से ये स्पष्ट हो रहा कि नेताओं ने सफाई के नाम पर सिर्फ वोट बटोरें हैं।


