New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है जिसमें देवघर स्थित परित्राण मेडिकल ट्रस्ट की सम्पति बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट की भूमि के म्यूटेशन और अस्पताल के संचालन के लिए जरुरी परमिशन देने का आदेश जारी किया गया था। झारखंड सरकार ने इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। शीर्ष अदालत में हुई सुनवाई के बाद अब बाबा बैद्यनाथ मेडिकल कॉलेज खुलने का रास्ता पूरी तरह से साफ़ हो चुका है।

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने अपने सोशल मिडिया प्रोफ़ाइल में लिखा है कि आज न्याय की जीत हुई, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने फ़ैसला दिया कि राज्य सरकार बाबा बैद्यनाथ मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए ज़बरदस्ती अड़ंगा डाल रही है।

गुरुवार को जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने झारखंड सरकार की ओर से दायर दोनों एसएलपी पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट के 15 जुलाई 2026 के आदेशों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। इसके बाद दोनों विशेष अनुमति याचिकाएं खारिज कर दी गयीं। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर एक अक्टूबर 2026 को इस मामले की एसएलपी संख्या 34211-34212/2026 की लिस्टिंग भी दर्ज है।
गौरतलब है कि झारखंड सरकार और अन्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर हाईकोर्ट के 15 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती दी गयी थी। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने देवघर में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज से जुड़ी जमीन के मामले में राज्य सरकार और परित्राण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की ओर से दायर अपीलों को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट में बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट से जुड़े मामले की अपीलें सूचीबद्ध थीं।
बता दें कि मामले की शुरुआत बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट द्वारा बैंक की सार्वजनिक नीलामी में परित्राण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की जमीन खरीदने के बाद हुई। ट्रस्ट ने नीलामी के बाद जमीन अपने नाम म्यूटेशन कराने के लिए आवेदन किया था। देवघर के अंचल अधिकारी ने आवेदन को खारिज कर दिया। इसके खिलाफ ट्रस्ट ने हाइकोर्ट का रुख किया था। एकल पीठ ने अंचल अधिकारी के आदेश को रद्द करते हुए ट्रस्ट के पक्ष में म्यूटेशन करने का निर्देश दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने अपील दायर की। पीएमसीएच की ओर से भी अलग अपील दाखिल की गयी थी। झारखंड हाइकोर्ट की 2026 की कार्यवाही में बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट बनाम राज्य सरकार से जुड़े मामले दर्ज हैं।
हाईकोर्ट ने मामले की पृष्ठभूमि और म्यूटेशन प्रक्रिया के दौरान राज्य के रुख को लेकर भी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि जिस जमीन का पहले पीएमसीएच के नाम म्यूटेशन हो चुका था, उसी जमीन के संबंध में नीलामी के सफल खरीदार के म्यूटेशन का विरोध करने की स्थिति पर विचार करना जरूरी है। खंडपीठ ने कहा था कि वैध नीलामी खरीदार को संपत्ति का लाभ लेने से रोकने वाली स्थिति नहीं बननी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार की दोनों एसएलपी खारिज किए जाने के बाद 15 जुलाई के हाईकोर्ट के आदेश प्रभावी बने हुए हैं। इससे बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट की ओर से प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से जुड़ी जमीन और आवश्यक प्रमाण पत्र की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।



