
New Delhi: गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे की शिकायत पर लोकसभा के विशेषाधिकार समिति ने 12 जनवरी को झारखंड के मुख्य सचिव,DGP,गृह सचिव,देवघर ज़िला उपायुक्त,देवघर पुलिस अधीक्षक को बुलाया है। इस बात की जानकारी गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने दी है।

पिछले दिनों आठ जनवरी को गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर झारखंड राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव सहित एसपी सहित जिले के वरीय अधिकारियों पर विशेषाधिकार और प्रोटोकॉल मानदंडों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। साथ ही सभी के खिलाफ पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए प्रीविलेज लाने का प्रस्ताव दिया था। सांसद ने कहा है कि इस शिकायत के बाद लोकसभा के विशेषाधिकार समिति ने 12 जनवरी को झारखंड के मुख्य सचिव,DGP,गृह सचिव, देवघर ज़िला उपायुक्त, देवघर पुलिस अधीक्षक को बुलाया है। सांसद निशिकांत दुबे को भी उसी दिन समिति को केस की जानकारी देनी है।

इस बारे में जानकारी देते हुए सांसद निशिकांत ने सोशल मीडिया अकॉउंट पर लिखा है “झारखंड सरकार मुझे बेवजह झूठे केसों में फँसाकर मुझे सांसद के तौर पर काम नहीं करने दे रही है । मेरे उपर अभीतक 42 केस पिछले 4 साल में दर्ज हुआ। लोकसभा के विशेषाधिकार समिति ने 12 जनवरी को झारखंड के मुख्य सचिव,DGP,गृह सचिव,देवघर ज़िला उपायुक्त,देवघर पुलिस अधीक्षक को बुलाया है। मुझे भी उसी दिन समिति को केस की जानकारी देनी है। “
क्या है मामला
सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र में कहा है कि दिसंबर 2019 में झामुमो की सरकार बनने के बाद भाजपा के विधायकों व सांसदों के खिलाफ शर्मनाक नीति शुरू की गयी है। मुख्य सचिव सहित सभी जिलों के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि भाजपा से संबंधित निर्वाचित प्रतिनिधियों को किसी भी कीमत पर उनके निर्वाचन क्षेत्रों में काम करने की अनुमति नहीं दी जाये। आवश्यक हो तो एफआइआर का सहारा लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान प्रशासन ने मेरे व मेरे परिवार के ऊपर 35 केस दर्ज किये। मेरे प्रति इतनी शत्रुता है कि मेरे जीवन को गंभीर खतरा होने की खुफिया जानकारी भी मिली है, कहने की जरूरत नहीं है कि झारखंड राज्य सरकार के लगभग सभी अधिकारियों द्वारा मेरे प्रति प्रदर्शित इस प्रकार के प्रतिशोधी रवैये का गंभीर विशेषाधिकार के उल्लंघन और प्रोटोकॉल मानदंडों के उल्लंघन के रूप में गहरा अर्थ था।
सांसद ने स्पीकर से आगामी बजट सत्र के दौरान इस मामले को सदन में उठाने की इजाजत मांगी है, ताकि देश को यह पता चल सके कि अलग राजनीतिक दल के जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कैसे झूठी एफआइआर दर्ज करायी जा रही है।


