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दिव्यांगों ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए शुरू की सियाचिन ग्लेशियर पर चढ़ाई

भारतीय सेना के दिग्गजों से प्रशिक्षित आठ दिव्यांगों की इस टीम ने सियाचिन बेस कैंप से सियाचिन ग्लेशियर पर चढ़ाई शुरू कर दी है।

नई दिल्ली: सियाचिन ग्लेशियर की ऊंचाई मापकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए दिव्यांगों ने बुधवार से ‘ऑपरेशन ब्लू फ्रीडम’ शुरू किया है। भारतीय सेना के दिग्गजों से प्रशिक्षित आठ दिव्यांगों की इस टीम ने सियाचिन बेस कैंप से सियाचिन ग्लेशियर पर चढ़ाई शुरू कर दी है।

हाल ही में भारत सरकार ने सियाचिन ग्लेशियर को मापने के लिए दिव्यांगों की इस टीम का नेतृत्व करने के लिए ‘कॉन्कर लैंड एयर वाटर’ (सीएलएडब्ल्यू) को मंजूरी दी है। इसके बाद यह टीम मालदीव के खुले समुद्र में स्कूबा डाइव करने और दुबई में पैरा जम्पिंग करने के विश्व रिकॉर्ड बनाएगी।

यह विश्व रिकॉर्ड अभियान ‘ऑपरेशन ब्लू फ्रीडम ट्रिपल वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ अभियान का हिस्सा है। ट्रिपल एलीमेंटल वर्ल्ड रिकॉर्ड्स 2021 में दिव्यांगों की यह टीम भूमि, हवा और पानी के भीतर विश्व रिकॉर्ड बनाने की एक श्रृंखला चला रही है।

इन्हें भूमि, वायु और जल प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी भारतीय सशस्त्र बलों के दिग्गजों के समूह सीएलएडब्ल्यू ने ली है। समूह के सदस्य तीन विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए टीम को स्काई डाइविंग, स्कूबा डाइविंग और पर्वतारोहण में प्रशिक्षित कर रहे हैं।

सियाचिन ग्लेशियर पर चढ़ाई शुरू करने का प्रशिक्षण देने के लिए पहले 20 दिव्यांगों को चुना गया, जिसके बाद अंतिम अभियान दल में कम से कम आठ दिव्यांगों सहित टीम को रवाना किया गया है, जो सियाचिन बेस कैंप से करीब 15,632 फीट की ऊंचाई पर स्थित कुमार पोस्ट तक ट्रेकिंग करेगी।

दिव्यांगों की टीम का नेतृत्व करने वाले पूर्व पैरा अधिकारी मेजर विवेक जैकब ने विशेष बलों के दिग्गजों के संगठन ‘कॉन्कर लैंड एयर वाटर’ (सीएलएडब्ल्यू) की स्थापना की है, जो दिव्यांगों को इस चुनौती भरे कार्य को संभव बनाने में मदद कर रहा है।

उन्होंने बताया कि दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र माना जाने वाला सियाचिन ग्लेशियर पृथ्वी पर सबसे कठोर इलाकों में से एक है। वहां का तापमान शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस नीचे रहता है। सियाचिन ग्लेशियर हिमालय में पूर्वी काराकोरम रेंज में स्थित है, जहां भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा समाप्त होती है।

उन्होंने बताया कि काराकोरम रेंज हिमाच्छादित हिस्से में यूरेशियन प्लेट को भारतीय उपमहाद्वीप से अलग करता है, जिसे कभी-कभी ‘तीसरा ध्रुव’ भी कहा जाता है। यह दुनिया के गैर-ध्रुवीय क्षेत्रों में दूसरा सबसे लंबा ग्लेशियर है।

यहां पहुंचकर दिव्यांगों की टीम विश्व रिकॉर्ड बनाएगी। पूर्व पैरा अधिकारी मेजर विवेक जैकब ने बताया कि सियाचिन ग्लेशियर पर पहुंचने के बाद दिव्यांग टीम की योजना मालदीव के खुले समुद्र में स्कूबा डाइव करके एक और रिकॉर्ड बनाने की है। इसके बाद वे दिसम्बर तक दुबई में पैरा जम्पिंग करके तीसरा विश्व रिकॉर्ड बनाएंगे।

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