
नई दिल्ली: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की ओर से विकसित की गई एंटी COVID-19 दवा 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज ( 2-डीजी ) की पहली खेप सोमवार को लॉन्च की गई. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने दिल्ली में यह खेप लॉन्च की.डीसीजीआई ने डीआरडीओ की कोविड रोधी दवा 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) को हाल ही में इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी. डीआरडीओ ने इस दवा को डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के साथ मिलकर तैयार किया है .

इस मौके पर डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, ‘’DRDO के समर्थन के साथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में, यह (2-DG) COVID-19 के खिलाफ लड़ने के लिए हमारा पहला स्वदेशी शोध-आधारित नतीजा हो सकता है. यह रिकवरी टाइम और ऑक्सीजन की निर्भरता को कम करेगा.’’ इसके अलावा उन्होंने कहा, ”मुझे उम्मीद है कि यह दवा आने वाले दिनों में COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के काम आएगी.”

इस दवा को लेकर राजनाथ सिंह ने कहा, ‘’मुझे बताया गया कि इसके प्रयोग से सामान्य उपचार की अपेक्षा लोग ढाई दिन जल्दी ठीक हुए हैं. साथ ही ऑक्सीजन निर्भरता भी लगभग 40 फीसदी तक कम देखने को मिली है. इसका पाउडर फॉर्म में होना भी इसकी एक बड़ी खासियत है. इसे ORS घोल की तरह इसका इस्तेमाल लोग बड़ी आसानी से कर सकेंगे.’’
रक्षा मंत्री ने कहा कि अब तक हम डिफेंस के क्षेत्र में डीआरडीओ और प्राइवेट पार्टनरशिप की बात करते थे, आज हेल्थ के सेक्टर में भी डीआरडीओ और प्राइवेट सेक्टर की पार्टनरशिप का इतना अच्छा परिणाम देख कर मुझे वाकई बहुत खुशी हो रही है.
रक्षा मंत्रालय ने इस महीने के शुरू में कहा था कि COVID-19 के मध्यम लक्षण वाले और गंभीर लक्षण वाले मरीजों पर 2-DG दवा के आपात इस्तेमाल को भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) की ओर से मंजूरी मिल चुकी है.
2-DG को लेकर DRDO प्रमुख जी सतीश रेड्डी ने कहा कि जून के पहले हफ्ते से देश में सभी जगहों पर 2-DG दवा उपलब्ध होगी. इसके अलावा उन्होंने कहा कि यह दवा कोरोना वायरस से संक्रमित कोशिकाओं पर सीधा काम करेगी, शरीर का इम्यून सिस्टम काम करेगा और मरीज जल्दी ठीक होगा.
सतीश रेड्डी ने कहा कि मरीज के वजन और डॉक्टर के प्रिसक्रिप्शन के आधार पर कम से कम 5-7 दिन सुबह-शाम 2 डोज लेनी होंगी.
कैसे खाई जाती है ये दवा?
कोरोना की ये दवा एक सैशे में पाउडर के रूप में आती है, जिसे पानी में घोलकर लिया जाता है. यह कोरोना वायरस से संक्रमित कोशिकाओं में जमा होती है और वायरल संश्लेषण और ऊर्जा उत्पादन को रोककर वायरस को शरीर में बढ़ने से रोकती है. वायरस से संक्रमित कोशिकाओं में जाना इस दवा को सबसे बेजोड़ बनाता है.
कैसे करती है काम ?
इस दवा से देश में बहुमूल्य जीवन बचाए जाने की उम्मीद है. इससे कोरोना मरीजों के अस्पताल में बिताए जाने वाले दिनों की संख्या कम हो जाने की उम्मीद है. अब तक सामने आए शोध के अनुसार, यह दवा रोगियों को तेजी से ठीक करने में मदद करती है। ये दवा कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन देने पर निर्भरता को कम करती है. दरअसल, यह दवा ग्लूकोज का एक सब्स्टिट्यूट है. कोरोना वायरस अपनी एनर्जी के लिए मरीज के शरीर से ग्लूकोज लेता है, मगर ग्लूकोज के धोखे में वह इस दवा का इस्तेमाल करने लगता है जिससे वायरस को एनर्जी मिलना बंद हो जाती है और उनका वायरल सिंथेसिस बंद होने लगता है. इस तरह नए वायरस का बनना बंद हो जाता है और साथ ही बाकी वायरस भी मरने लगते हैं.
कब और कितनी मात्रा में ली जाती है ये दवा?
यह दवा सैशे (पाउच) में पाउडर के रूप में मिलेगी, जिसे पानी में मिलाकर मुंह से ही मरीज को दिया जाएगा. हालांकि यह दवा की कितनी मात्रा और कितने समय में दी जानी है, इसका निर्णय डॉक्टरों पर छोड़ा गया है. इस बारे में डॉक्टर मरीज की उम्र, मेडिकल कंडीशन आदि की जांच करके ही करेंगे। बता दें कि डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने बिना डॉक्टर की सलाह, कोरोना से बचने के नाम पर या ज्यादा मात्रा में यह दवा न लेने की चेतावनी भी दी गई है.


