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कपड़ों पर GST बढ़ाने का फैसला टला

वस्तु एवं सेवा कर (GST) की नीति-निर्धारक संस्था जीएसटी काउंसिल ने कई राज्यों की आपत्तियों को देखते हुए कपड़ा उत्पादों पर शुल्क की दर को पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने के फैसले का क्रियान्वयन टाल दिया है।

New Delhi: जीएसटी काउंसिल (GST Council) ने कपड़ों पर टैक्स पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई काउंसिल की बैठक में इस बढ़ोतरी को टालने का फैसला किया गया। वस्तु एवं सेवा कर (GST) की नीति-निर्धारक संस्था जीएसटी काउंसिल ने कई राज्यों की आपत्तियों को देखते हुए कपड़ा उत्पादों पर शुल्क की दर को पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने के फैसले का क्रियान्वयन टाल दिया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई जीएसटी काउंसिल की 46वीं बैठक में कपड़ा उत्पादों पर शुल्क बढ़ाने के फैसले पर चर्चा हुई। सितंबर में इसे पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने का फैसला लिया गया था। इसे एक जनवरी, 2022 से लागू किया जाना था। गुजरात समेत कई राज्य इसका विरोध कर रहे थे कि इस फैसले का आम आदमी एवं कारीगरों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

बैठक के बाद आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री बुग्गना राजेंद्रनाथ रेड्डी ने संवाददाताओं को बताया कि कई राज्यों की आपत्तियों को देखते हुए कपड़ा उत्पादों पर 12 फीसदी की दर से जीएसटी लगाने के फैसले को टालने का निर्णय किया गया है। रेड्डी के मुताबिक, इस बैठक में कई राज्यों का यह कहना था कि परिधान, वस्त्रों एवं कपड़ा उत्पादों पर जीएसटी लागू होने को लेकर स्पष्टता नहीं है। दरअसल, कई राज्य सरकारों से लेकर इन क्षेत्रों से जुड़े उद्योग और कारोबारी इसका विरोध कर रहे थे।

इस बीच कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस फैसले को टाले जाने का स्वागत किया है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि इससे देश के लाखों कपडा व्यापारियों को राहत मिलेगी] ये पिछले एक महीने से ज्यादा वक्त से बेहद तनाव की जिंदगी जी रहे थे। खंडेलवाल ने यह भी कहा कि कपड़े की तरह फुटवियर पर भी जीएसटी दर बढ़ाने के निर्णय को स्थगित करना जरूरी है।

राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित जीएसटी काउंसिल की बैठक में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, डॉ. भागवत किशनराव कराड के साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री भी शामिल हुए। इससे एक दिन पहले सीतारमण के साथ हुई बजट-पूर्व बैठक में भी कई राज्यों के वित्त मंत्रियों ने इस मुद्दे को उठाया था। वहीं, गुजरात, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, राजस्थान एवं तमिलनाडु जैसे राज्यों ने इसका विरोध किया था।

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