
Gopalganj: बिहार में गोपालगंज जिले के एक आरोपित को 28 वर्षों के बाद दोषमुक्त करार दिया गया है। वह अपहरण कांड में गोपालगंज जेल में विचाराधीन कैदी बन कर सजा काट रहा था। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पांच विश्वविभूति गुप्ता की कोर्ट ने गुरुवार को उसे दोषमुक्त पाते हुए बाइज्जत बरी कर दिया।

कोर्ट का फैसला सुनते ही आरोपित कोर्ट में फूट-फूट कर रो पड़ा। कोर्ट ने पुलिस की चूक पर टिप्पणी की है। कांड के ट्रायल के दौरान पुलिस ना तो कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रख सकी और ना ही कांड के अनुसंधानकर्ता ही कोर्ट में गवाही के लिए आये और ना ही पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर। पुलिस की ओर से चार्जशीट तक नहीं सौंपी गयी थी।

कांड की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा था। फास्ट ट्रैक कोर्ट के वर्षों से बंद रहने के कारण इस कांड की सुनवाई वर्षो से बाधित रही। अंत में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पांच की कोर्ट में जब कांड ट्रांसफर होकर पहुंचा तो कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेकर ट्रायल को पूरा कराने के लिए सुनवाई शुरू किये।
भोरे के अपहरण कांड में गया था जेल
भोरे थाना के हरिहरपुर गांव के रहने वाले सूर्यनारायण भगत 11 जून, 1993 को देवरिया के बनकटा थाना क्षेत्र के टड़वां गांव के रहने वाले युवक बीरबल भगत के साथ मुजफ्फरपुर के लिए घर से निकले थे। उसके बाद से लापता हो गये। परिजन काफी तलाश करते रहे। बाद में 18 जून 1993 को सूर्यनारायण भगत के पुत्र सत्यनारायण भगत के बयान पर भोरे थाना कांड संख्या-81/93 दर्ज कर बीरबल भगत को नामजद अभियुक्त बनाया गया।
बाद में देवरिया पुलिस ने एक अज्ञात शव को जब्त किया। जिसका यूडी केस दर्ज कर शव को दफना दिया। कुछ दिनों बाद परिजनों ने देवरिया पुलिस से मिले तस्वीर के आधार पर पहचाना कि सूर्यनारायण भगत की शव थी। उधर, देवरिया पुलिस ने बीरबल भगत को 27 जनवरी, 1994 को एक दूसरे आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया। उसमें 11 वर्षों तक सजा कटाने के बाद भोरे पुलिस ने रिमांड पर लेकर गोपालगंज जेल में बंद कर दिया था।
कौन लौटायेगा बीरबल की जवानी
देवरिया के बनकटा थाने के टडवां गांव के रहनेवाले बीरबल भगत को पुलिस ने गिरफ्तार किया तो उसकी उम्र महज 28 वर्ष की थी। आज 57 वर्ष के बाद जेल से शुक्रवार को बाहर होगा। सवाल उठता है कि आखिर उसका जवानी अब कौन लौटायेगा। उसका भी अपना सपना था, जो जेल में जाकर बिखर गया। उसे अपराधी मानकर परिजन व रिश्तेदारों ने भी जेल में छोड़ दिया। किसी ने जमानत तक कराने के लिए कोर्ट में प्रे नहीं किया। आज बेगुनाह साबित होने के बाद बुढ़ापे में परिवार व नाते-रिश्तेदार के लोग उसे पहचानेंगे कि नहीं यह भी उसे नहीं पता था, पूछने पर उसके आंखों से सिर्फ आंसू टपक रहा था।



