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शराबबंदी वाले बिहार में फिर से होगी ‘नीरा’ की बिक्री

बिहार सरकार जहां शराबबंदी कानून को लागू करने को लेकर सख्ती बरत रही है, वही एकबार फिर से 'नीरा' के उत्पादन और बिक्री पर जोर दे रही है।

Patna: बिहार सरकार जहां शराबबंदी कानून को लागू करने को लेकर सख्ती बरत रही है, वही एकबार फिर से ‘नीरा’ के उत्पादन और बिक्री पर जोर दे रही है।

योजना का उद्देश्य ताड़ी (एक प्रकार का नशीला पेय पदार्थ, जो ताड़ या खजूर के पेड़ से निकाला जाता है) के उत्पादन और बिक्री में पारंपरिक रूप से जुड़े परिवारों को नीरा उत्पादन और जीविकोपार्जन योजना से जोड़ना है।

वित्तीय वर्ष 2022-23 में 46 लाख लीटर से ज्यादा नीरा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। नीरा 1672 बिक्री केंद्रों के माध्यम से बेचने की योजना बनाई गई है।

नीरा के उत्पादन और बिक्री की जिम्मेदारी जीविका के स्वयं सहायता समूह को दी गई है। जीविका के माध्यम से स्वयं सहायता समूह के तहत लोगों को रोजगार देने की योजना है।

मद्य और निषेध विभाग ने नीरा संग्रहण, उत्पादन और मार्केटिंग को लेकर कार्ययोजना तैयार की है।

विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य के सभी 38 जिलों में 12893 नीरा उत्पादकों प्रशिक्षण देने भी तैयारी है। 460 नीरा समूह के गठन का लक्ष्य है, जिसके तहत अभी तक 272 समूह का गठन कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि 26 मार्च से नीरा का संग्रह का कार्य शुरू हो जाएगा।

उल्लेखनीय है कि राज्य में अप्रैल 2016 से लागू शराबबंदी के बाद से ही ताड़ के पेड़ों से नीरा उत्पादन सरकार की ओर से किया गया था। वर्ष 2017-18 में राज्य के कई जिलों में इसकी बिक्री की गई थी।

इसके लिए राज्य में तीन स्थानों पर नीरा चिलिंग प्लांट भी लगाए गए थे। हालांकि इस दौरान इस योजना में आशातीत सफलता नहीं मिली। सरकार अब इस योजना को तेज करने में जुटी है।

ताड़ और खजूर के पेड़ से ताड़ी उतारने व बिक्री करने वाले लोगों को नीरा योजना के तहत प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ ही उन्हें राज्य सरकार 1 लाख रुपए आर्थिक मदद भी दे रही है।

उल्लेखनीय है कि शराबबंदी के बाद ताड़ी पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद नीरा पर जोर दिया गया। राज्य में नीरा के उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। नीरा को प्रोसेसिंग कर पेड़ा सहित कई मिठाइयां भी बनाई जा सकती हैं।

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