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Bihar: शाहाबाद रेंज में भू-दान आंदोलन से मिली 1.5 लाख एकड़ से अधिक जमीन का कोई अता-पता नहीं

बिहार में बक्सर जिले के RTI कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय ने भूदान आंदोलन (bhoodan movement) से मिली जमीन और उसके इस्तेमाल की जानकारी मांगी तो कई चौंकाने वाले मामलों का खुलासा हुआ है।

Ara(Bihar): बिहार में बक्सर जिले के RTI कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय ने भूदान आंदोलन (bhoodan movement) से मिली जमीन और उसके इस्तेमाल की जानकारी मांगी तो कई चौंकाने वाले मामलों का खुलासा हुआ है। शाहाबाद क्षेत्र के भोजपुर,बक्सर,रोहतास और कैमूर जिले के करीब 1.5 लाख एकड़ जमीन का कोई अता-पता नहीं है।

आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक विनोबा भावे के स्वैच्छिक भूमि सुधार आंदोलन के आह्वान पर पुराने शाहाबाद के नागरिकों और किसानों द्वारा दान किये गए जमीन का बड़ा हिस्सा सरकारी अधिकारियों की लाल फीताशाही की भेंट चढ़ गयी है। पुराने शाहाबाद के चार जिलों भोजपुर,बक्सर, रोहतास और कैमूर में कुल एक लाख 96 हजार 525 एकड़ जमीन भू-दान आंदोलन के तहत किसानों और रैयती नागरिकों ने दान की थी।शाहाबाद के कैमूर और सासाराम में सर्वाधिक किसानों ने भूमि दान की थी।

राजस्व विभाग के भूमि रिकॉर्ड के अनुसार रोहतास में 82 हजार 737 एकड़ 61 डिसमिल जमीन भूदान में मिली थी जिसमे से सिर्फ 15 हजार 36 एकड़ जमीन जरूरतमंदों में वितरित की गई।कैमूर में सर्वाधिक एक लाख 12 हजार 365 एकड़ जमीन भूदान में मिली थी।इनमे से 13 हजार 464 एकड़ जमीन ही जरूरतमंदों के बीच बांटी जा सकी।

भोजपुर में हालांकि किसानों और रैयतों द्वारा भूदान में जमीन कम मिली लेकिन यहां भी भूदान में मिले 842 एकड़ 58 डिसमिल जमीन में से वर्ष 2018 तक सिर्फ 748 एकड़ 38 डिसमिल जमीन ही जरूरतमंदों के बीच वितरित की गई है।यहां बाकी की 94 एकड़ जमीन का कुछ पता नहीं है। जबकि वर्ष 2018 के बाद यहां किसी जरूरतमंदों को जमीन वितरित नही की गई है।

भोजपुर में भू-दान से मिली जमीन में से 1,414 भूमिहीनों को जमीन वितरित की गई है जिसमे अनुसूचित जाति के 526 भूमिहीनों के बीच 340 एकड़ 50 डिसमिल जमीन वितरित की गई है। भारत में गणतंत्र लागू होने और संत विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में पुराने शाहाबाद जिले के गरीबों द्वारा दान में दिये गए जमीन का बड़ा भूभाग हड़प लिया गया है।गरीबों की लगभग तीन लाख एकड़ जमीन सरकारी नौकरशाहों और अधिकारियों की लाल फीताशाही की भेंट चढ़ गई है और बड़े स्तर पर संत विनोबा भावे के आह्वान पर भूदान में किसानों और रैयतों द्वारा दान में दी गई जमीन का शाहाबाद के रोहतास, कैमूर, बक्सर और भोजपुर में घोटाला हुआ है।

भू-दान आंदोलन से मिली जमीन को या तो दान करने वाले रैयतों के वंशजों ने कब्जा कर लिया या फिर अवैध तरीके से बेच दी गई।शाहाबाद के कई इलाकों में अवैध तरीके से भूदान में मिली जमीन को बेच दिये जाने की जानकारी मिलने पर रजिस्ट्री रद्द कर दी गई।संत विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में रैयतों से मिली जमीन को बचाकर रखा गया होता तो आज कोई भी गरीब भूमिहीन नही होता और सभी को सरकार के स्तर से जमीन मिल गया होता।

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