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मनाई गई शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती

पीस सेंटर परिधि द्वारा मंगलवार को शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती मनाई गई।

भागलपुर: पीस सेंटर परिधि द्वारा मंगलवार को शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती मनाई गई।वर्चुअल माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में संस्कृतिकर्मी उदय ने कहा कि भगत सिंह वैज्ञानिक और क्रांतिकारी सोच रखने वाले युवा थे।

आजादी आंदोलन में कई धाराएं थी जिसमें से एक प्रमुख धारा के नायक थे भगत सिंह। वे नास्तिक और धर्म विरोधी थे। मतलब हिंदुत्व विरोधी थे। वे भारत की विविधता के पक्षधर थे। उनके मन में आधुनिक भारत का एक सपना था जो विज्ञान, तथ्य और समाजवाद पर आधारित था।

कार्यक्रम की शुरुआत विनय कुमार भारती और लाडली राज द्वारा जन गीत “मसालें लेकर चलना कि जब तक रात बाकी है” से की गई। इस अवसर पर सार्थक भरत ने कहा कि शहीद भगत सिंह ने न सिर्फ आजादी की लड़ाई में शहादत दिया है, बल्कि एक समानता पर आधारित समाज की कल्पना की। उन्होंने जिस आजाद भारत का सपना देखा था वैसे समाज में समता का गुण सबसे आवश्यक माना था।

उन्होंने 1928 में अछूत की समस्या पर एक लेख लिखा था। उनका मानना था कि हमें सभी मनुष्यों को एक समान रूप से देखना चाहिए। जन्म या उसके काम के आधार पर भेदभाव को बंद करना पड़ेगा तभी समतामूलक समाज का निर्माण हो सकता है। उन्होंने अछूतों और शोषितों को अपने गौरवपूर्ण इतिहास से सीख लेकर समाज परिवर्तन का आह्वान किया था।

संचालन करते हुए पीस सेंटर परिधि के संयोजक राहुल ने कहा कि शहीदे आजम भगत सिंह को याद करने का मतलब है कि हम उन मूल्यों को याद कर रहे हैं। जिसके लिए उन्होंने शहादत दी। मूल्य समता का, बराबरी का, वैज्ञानिक सोच का, समाजवाद का। वह एक ऐसे आजाद देश की बात करते थे जिसमें गरीब से गरीब मनुष्य को भी बराबरी का दर्जा प्राप्त होगा और किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। हम युवाओं को उसी गौरवशाली देश का निर्माण करना है।

भगत सिंह के जयंती पर विनय कुमार भारती के संयोजन में जन गीत और गजल के भी कार्यक्रम हुए। ऐ भगत सिंह तू जिंदा है हर एक लहू के कतरे में, इंसान को अछूत और गुलाम किया है, यह कैसा करम है, यह कैसा धर्म है,” जालिब हबीब के नज़्म “दीप जिसके मोहल्लात में ही जले” आदि गीतों ने समा बांध दिया। इस मौके पर लाडली राज, उमेश प्रसाद, ललन कुमार, उदय, अमन, सार्थक भरत अभिषेक कुमार, मुस्कान, ज्ञानरंजन आदि मौजूद थे।

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