
Kolkata : नाबालिग छात्रों को ब्लड डोनेट करने के लिए बहलाने-फुसलाने के मामले में मुख्य आरोपी किंगशुक मुखर्जी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने गुरुवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी को ओडिशा से गिरफ्तार किया गया है।

इस महीने की शुरुआत में इस्पात नगरी के एक प्राइवेट स्कूल के कुछ नाबालिग छात्रों को पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर के बिधाननगर में एक प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उनका रक्त लिया गया। मामला सामने आने के बाद दुर्गापुर पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। उस शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की।

जांचकर्ताओं ने बताया कि सबसे पहले स्कूल के पूर्व छात्र देबप्रिया चक्रवर्ती का नाम सामने आया। आरोप है कि देबप्रिया ने पैसे का लालच देकर नाबालिग छात्रों को हॉस्पिटल पहुंचाया था। पूछताछ के दौरान उसने दावा किया कि उसे इस काम के लिए दूसरों के जरिए रखा गया था।
इसके बाद जांच में तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) के सदस्य अमित प्रसाद यादव का नाम सामने आया। मालदा के रहने वाले मोहम्मद हबीबुल्लाह का कनेक्शन भी सामने आया, जो बिधाननगर के एक होटल में काम करता था। हालांकि, जांच ने तब नया मोड़ लिया जब किंगशुक मुखर्जी का नाम सामने आया।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि इस साजिश में किंगशुक की अहम भूमिका थी। जांचकर्ता इस बात की जांच कर रहे हैं कि पैसे का लालच देकर नाबालिगों को रक्तदान करने के लिए कैसे मनाया गया, उन्हें हॉस्पिटल कौन ले गया और क्या इसमें कोई बड़ा गिरोह शामिल था।
6 अगस्त को दुर्गापुर पुलिस ने एक रेड में देबप्रिया चक्रवर्ती, मोहम्मद हबीबुल्लाह और अमित प्रसाद यादव को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि आगे की पूछताछ में किंगशुक मुखर्जी का नाम और भूमिका सामने आई।
हालांकि, किंगशुक का घर दुर्गापुर के बिधाननगर में है, लेकिन घटना के बाद से वह ओडिशा में छिपा हुआ था। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने एक रेड में उसे गिरफ्तार कर लिया।
दुर्गापुर पूर्व से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक चंद्र शेखर बनर्जी ने कहा कि पुलिस बिना किसी भेदभाव के जांच कर रही है और इस गंभीर अपराध में शामिल लोगों को सजा दी जाएगी। (IANS)



