
Kolkata : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी बुधवार को एक बार फिर उत्तर 24 परगना जिले की बिधाननगर अदालत में पेश नहीं हुए। उन्हें हाल में हुए विधानसभा चुनाव से जुड़े कथित हेट स्पीच मामले की सीआईडी जांच के तहत अपनी आवाज का नमूना (Voice sample) देने के लिए अदालत में उपस्थित होना था।

अदालत के निर्देश के अनुसार, अभिषेक बनर्जी को बुधवार दोपहर 12 बजे तक अदालत में उपस्थित होकर न्यायिक मजिस्ट्रेट और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में वॉयस सैंपल देना था।

सीआईडी अधिकारियों की टीम दोपहर 12 बजे तक अदालत पहुंच गई थी। हालांकि, अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी का इंतजार किया, लेकिन वह वॉयस सैंपल देने के लिए अदालत नहीं पहुंचे।
इसके बाद सरकारी वकील बिवास चट्टोपाध्याय ने अदालत को बताया कि टीएमसी महासचिव दूसरी बार वॉयस सैंपल देने के लिए अदालत में पेश नहीं हुए हैं। इससे साफ है कि वह जांच प्रक्रिया में देरी करने और उसे बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं।
बाद में सरकारी वकील ने अदालत में एक लिखित बयान भी दाखिल किया। इसमें आरोप लगाया गया कि अभिषेक बनर्जी जानबूझकर हेट स्पीच मामले की जांच में देरी कर रहे हैं। उन पर हिंसा भड़काने वाले बयान देने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने का आरोप है।
लिखित बयान में सरकारी वकील ने यह भी कहा कि अभिषेक बनर्जी का बार-बार उपस्थित न होना अदालत के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन है। इसलिए अब उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने का समय आ गया है।
दरअसल, मंगलवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने सवाल उठाया था कि जब अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तारी सहित किसी भी तरह की पुलिस कार्रवाई से 31 जुलाई तक अंतरिम राहत मिली हुई है, तो वह जांच में सहयोग करने से क्यों बच रहे हैं?
वॉयस सैंपल देने के लिए बिधाननगर अदालत में पेश होने के आदेश से राहत पाने के लिए अभिषेक बनर्जी के वकील ने मंगलवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत में तत्काल सुनवाई की मांग की थी। उन्होंने जिला अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें वॉयस सैंपल देने का निर्देश दिया गया था।
हालांकि, न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने तत्काल सुनवाई की मांग खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी को जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना चाहिए और बिना किसी देरी के वॉयस सैंपल देना चाहिए। (IANS)


