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MP निशिकांत दुबे ने AIIMS को लेकर LS में 2011-12 में पुरजोर तरीके से रखी थी अपनी बात, पढ़िए पूरी Speech

गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने झारखंड और खासकर संथाल परगना जैसे पिछड़े इलाके में AIIMS जैसे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की मांग और जरूरत पर लोकसभा में साल 2011 और 2012 में तथ्यों के साथ पुरजोर तरिके से मांग रखी थी।

नई दिल्ली: गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने झारखंड और खासकर संथाल परगना जैसे पिछड़े इलाके में AIIMS जैसे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की मांग और जरूरत पर लोकसभा में साल 2011 और 2012 में तथ्यों के साथ पुरजोर तरिके से मांग रखी थी।

साल 2011 में निशिकांत दुबे ने लोकसभा में दुमका के हसडिहा में एम्स जैसे अस्पताल की मांग कनकटा व उसके जैसे गांव की उस जरूरत को ध्यान में रखकर की थी। जहां तीन सौ की आबादी में बीस लोग विकलांग हुआ करते थे। उनके इस मांग पर तबके मंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने यह जवाब दिया था कि झारखण्ड में एम्स स्थापित करने की सरकार की कोई योजना नहीं है।

आईये अब उस सच को ध्यान से पढ़ते हुए समझ जाईये कि गोड्डा लोकसभा के MP निशिकांत दुबे ने झारखण्ड में एम्स की स्थापना को लेकर किस कदर तथ्यात्मक मांग रखी थी। हम आपको यहां उनके द्वारा लोकसभा में दिए गए साल 2011 और 2012 के SPEECH को हूबहू रख रहे हैं।

12 दिसंबर 2011 को लोकसभा में दिया गया Speech

श्री निशिकांत दुबे (गोड्डा): सभापति जी, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। मेरे लोकसभा क्षेत्र में दुमका जिला है जो संथाल परगना का एरिया है। उसमें एक गांव कनकटा है, उसकी तीन सौ आबादी है, जिसमें से 20 लोग विकलांग हैं। मैं बराबर इस लोकसभा में यह कहता रहा हूं कि आपने एम्स बनाया है, एम्स जैसे इंस्टीटय़ूट बनाए हैं, आप एनआरएचएम के माध्यम से हेल्थ पर पैसा खर्च कर रहे हैं, आप मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स में एमडीएस फोर, फाइव के मेंबर हैं और झारखंड एक ऐसा प्रदेश है, ,खासकर संथाल परगना जहां से मैं आता हूं, यदि कनकटा जैसे गांव में, जहां तीन सौ की आबादी में बीस लोग विकलांग हैं और आसपास के दूसरे गांवों में यदि आप देखेंगे, तो आपको छः-सात से दस-पन्द्रह परसेंट लोग विकलांग दिखायी देंगे। वहां एक एम्स जैसे इंस्टीटय़ूशन की आवश्यकता है, क्योंकि प्रत्येक दिन संथाल परगना में दस महिलाएं बच्चों को जन्म देते ही मर जाती हैं और बच्चों का जो डेथ का रेश्यो है, वहां कम से कम 62-63 बच्चे प्रत्येक एक हजार में मर जाते हैं। वहां लगभग अस्सी परसेंट एनीमिक महिलाएं हैं और लगभग पैंसठ परसेंट बच्चे माल न्यूट्रेशन का शिकार हैं।

महोदय, मेरा आपके माध्यम से सरकार से यह आग्रह है कि आप ऑल इंडिया इंस्टीटय़ूट ऑफ़ मेडिकल साइंस जैसा कोई इंस्टीट्यूशन खोलें, जिससे झारखंड मरहूम है, इतनी बड़ी आबादी है, आपकी सरकार की किटी में माइंस और मिनरल्स के माध्यम से मोर दैन सिक्स्टी परसेंट कांट्रीब्यूट कर रहा है।

संथाल परगना में हसडिहा उस का एक सेन्टर प्वाइंट है। वहां एक ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टिट्टयूट जैसा इंस्टिटय़ूशन दीजिए। मैं दुमका जिले के सरैया हाट ब्लॉक के बारे में कह रहा हूं और कनकट्टा जो गादीझोपा पंचायत में है यहां मेडिकल की एक टीम भेजी जाए और देखा जाए कि इस ब्लॉक में जो बच्चे पैदा हो रहे हैं, वे विक्लांग क्यों पैदा हो रहे हैं? उनकी हालत ऐसी क्यों है? उनकी ऐसी हालत पानी, माल-न्यूट्रिशंस, एनिमिया या किसी प्रकृति के कारण है। आप के माध्यम से वहां तुंत एक टीम भेजी जाए तो बड़ी कृपा होगी। जय हिंद, जय भारत।

4 मई 2012 को लोकसभा में दिया गया Speech

श्री निशिकांत दुबे (गोड्डा):  अध्यक्ष महोदया, आज मैं आपके माध्यम से आल इंडिया इंस्टीटय़ूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जो कि आज भी भारत का गौरव है और हमारे जैसे लोग जो झारखण्ड, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश से आते हैं, जो गरीबों के इलाज का एक संस्थान है, से लगातार डाक्टर्स का पलायन हो रहा है। लगातार न्यूज पढ़ने को मिलती है कि बिना किसी कारण के आज यह डाक्टर चला गया और उसका कारण यह है कि डाक्टरों को लगता है कि जिस माहौल के कारण यह आल इंडिया इंस्टीटय़ूट ऑफ मेडिकल साइंसेज बना, गरीबों का जिस तरह से यहां इलाज होना था और हमारे जैसे सांसद जिसके लिए जूझते रहते हैं, उनको वह सुविधा नहीं मिल पाती है। जो कारण वे बताते हैं कि यदि हम किसी का आपरेशन करना चाहते हैं, तो आपरेशन की सुविधा नहीं है। यदि ओपीडी करना चाहते हैं, तो उसकी सुविधा नहीं है। उसका कारण यह है कि 50 के दशक में जब यह आल इंडिया इंस्टीटय़ूट ऑफ मेडिकल साइंसेज बना, उस वक्त जो सुविधाएं थी, वे सुविधाएं 33 करोड़ लोगों के लिए थीं, 40 करोड़ लोगों के लिए थीं, आज 120 करोड़ लोगों के लिए वे सुविधाएं कम पड़ रही हैं। यदि दिल्ली के अंदर ही देखेंगे, जो प्राइवेट हॉस्पिटल्स हैं,  उसने मान लीजिए एक बड़ा हॉस्पिटल बना लिया है, लेकिन अलग-अलग जगहों पर उन्होंने अपने सेन्टर बना लिए हैं, जहां पर ओपीडी होती है, छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज होते हैं, जहां महिलाओं की डिलीवरी होती है। लेकिन पिछले पांच-छः साल में केन्द्र सरकार की जो नीति रही है और जिस तरह डाक्टरों के साथ उन्होंने मिसबिहेव किया है, जिस तरह से उनको सुविधाएं नहीं दे रहे हैं, जिस तरह से हमारे जैसे लोग दुखी हो रहे हैं, मैं केन्द्र सरकार से  आपके माध्यम से मांग करूंगा कि जिस तरह प्राइवेट हॉस्पिटल्स जैसे अपोलो, मैक्स आदि ने दिल्ली के अंदर अपने अलग-अलग केंद्र बना लिए हैं, आप भी वैसे केन्द्र बनाएं या अलग-अलग जगहों पर छः एम्स खोल रहे हैं, उसी तरह से हमारे यहां झारखण्ड में, उत्तर प्रदेश में डिमाण्ड है, वहां भी खोलने चाहिए। मैं लगातार यह बात उठाते रहा हूं कि संथाल परगना, जहां से मैं आता हूं, वहां कनकटा जैसा एक गांव है, जहां पूरे गांव में विकलांग ही पैदा होते हैं। संथाल परगना जैसे एरिया में, हसडीहा में एम्स जैसे इंस्टीटय़ूट बनें, उत्तर प्रदेश में एम्स जैसे इंस्टीटय़ूट बनें, डाक्टर्स के साथ न्याय हो और आल इंडिया इंस्टीटय़ूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जो डाक्टर्स के लिए, रोगी के लिए, आम लोगों के लिए बना था, उसके लिए जितनी सुविधाएं हैं, वे दी जाएं और इसके विकास के लिए सरकार प्रयत्न करे। मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान इसकी तरफ आकर्षित करना चाहता हूं।

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