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कुम्हार जुटे कलश और दीप बनाने में, डेकोरेटर बना रहे हैं Gateway of India

त्योहारों का मौसम आ गया है, अब सात अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू हो जाएगी। इसको लेकर तैयारी तेज हो गई है, मंदिरों में मूर्तिकार प्रतिमा बना रहे हैं,

बेगूसराय: त्योहारों का मौसम आ गया है, अब सात अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू हो जाएगी। इसको लेकर तैयारी तेज हो गई है, मंदिरों में मूर्तिकार प्रतिमा बना रहे हैं, डेकोरेशन वाले आकर्षक पंडाल और गेट बनाने में जुट गए हैं। डेकोरेशन वाले कुछ ऐसी तैयारी कर रहे हैं कि इस वर्ष दुर्गा पूजा के अवसर पर बेगूसराय में कहीं इंडिया गेट दिखेगा तो कहीं गेटवे ऑफ इंडिया।

इन सब के बीच नवरात्र की सबसे अधिक तैयारी कुम्हार परिवार में हो रही है। बेगूसराय के कोने-कोने में बसे कुम्हार परिवार जोर-शोर से कलश, दीप और चौमुख बना रहे हैं। मौसम के मद्देनजर सभी परिवार सुबह से लेकर रात तक लगातार निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं ताकि मौसम विपरीत भी हो जाए तो श्रद्धालुओं को समय पर मिट्टी की बनी पूजन सामग्री पहुंचाई जा सके। इसके लिए कुम्हार परिवार में कोई मिट्टी ला रहा है तो कोई मिट्टी गूंथ रहा है। कोई चाक पर कलश चौमुख और दीप बना रहे हैं तो कोई इसे सुखाकर-पकाकर रंग रहा हैं। इन सब के साथ ही बच्चों के लिए मिट्टी के खिलौने का भी निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। गुल्लक तथा विभिन्न प्रतिमाएं बनाकर उसे चटख लाल और हरे रंग से रंगा जा रहा है।

रामपुर में कलश बनाने के लिए चाक चला रहे सीताराम पंडित ने बताया कि कोरोना के कारण पिछले दो वर्ष से हमलोगों के रोजी-रोटी पर भी आफत आ गया था लेकिन अब कोरोना का कहर कम गया है और सरकार ने तमाम धार्मिक स्थल खोल दिए हैं। ऐसे में इस वर्ष हमारे कलश और दीप की अधिक डिमांड होने की संभावना है। इसके मद्देनजर हम लोगों ने तैयारी शुरू कर दी है, बाजार के व्यापारी भी अब आकर ऑर्डर दे रहे हैं। क्रमबद्ध तरीके से उन्हें पहुंचाने के साथ-साथ हम लोगों द्वारा घर-घर जाकर भी बेचा जाएगा, परिवार के सभी लोग तन-मन से लगे हुए हैं। इधर बेगूसराय जिले के दो सौ से अधिक दुर्गा मंदिरों में पूजा की तैयारी शुरू हो गई है।सात अक्टूबर को कलश स्थापना के बाद मां भगवती के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा के साथ नवरात्र शुरू हो जाएगा।

ज्योतिष अनुसंधान केंद्र गढ़पुरा के पंडित आशुतोष झा ने बताया इस बार मां भगवती का आगमन डोली पर होगा यह शुभ नहींं है लेकिन हाथी पर मां की विदाई शुभ फलदायक होगा। उन्होंने बताया कि सात अक्टूबर को कलश स्थापना एवं शैलपुत्री का आवाहन-पूजन होगा। आठ अक्टूबर को देवी के ब्रह्मचारिणी स्वरूप, नौ अक्टूबर को चंद्रघंटा देवी, दस अक्टूबर को कुष्मांडा स्वरूप, 11 अक्टूबर को पंचमी एवं षप्ठी तिथि दोनों एक दिन रहने से स्कंदमाता और कात्यायनी पूजन एवं बेल आमंत्रण होगा। 12 अक्टूबर को कालरात्रि देवी का पूजन, सरस्वती आवाहन नवपत्रिका प्रवेश, 13 अक्टूबर को महागौरी का पूजन, अष्टमी व्रत, निशा पूजन एवं देवी जागरण, 14 अक्टूबर को सिद्धिदात्री देवीदुर्गा का आवाहन, महानवमी व्रत एवं हवन होगा। इसके बाद 15 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन अपराजिता पूजन, कलश विसर्जन, जयंती धारण एवं नीलकंठ दर्शन के साथ ही नवरात्र का समापन हो जाएगा। फिलहाल हर ओर दुर्गा पूजा की जोरदार तैयारी शुरू हो गई है, बाजार सज गए हैं।

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