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कोरोना संकट आपके अहंकार का विसर्जन करता है..जरा सोचिए..

By Sanjay Verma

सबसे पहले तो कोरोना संकट आपके अहंकार का विसर्जन करता है । अपने किसी अजीज़ के लिए जब आप एक अस्पताल , एक इंजेक्शन , एक ऑक्सीजन सिलेंडर तक नहीं जुगाड़ पाते तो आपको पता चलता है कि आप की तिजोरी में रखे वे नोट जिन पर आप इतराते थे , वे बस रंगीन कागज के टुकड़े भर हैं । आपके मोबाइल की कांटेक्ट लिस्ट में जिन लोगों की ताकत पर आपको गुरूर था असल में वे कागज के शेर थे ।

सुरक्षा का किला जो बरसो बरस मेहनत कर आपने बनाया था वह बस एक ताश का महल था , एक छोटे से वायरस ने उसे हिलाया और वह ढह गया ! आपको पता चलता है असल में आपकी औकात कुछ नहीं है ।

यहां तक तो ठीक है । अहंकार का खत्म हो जाना अच्छी बात है , पर यह वायरस यही नहीं रुकता । इसके हमले का दूसरा दौर शुरू होता है । आप जब समझ जाते हैं कि आप कुछ नहीं हैं , तो जान बचाने के लिए आप खुद को आइसोलेट करते हैं । तन से नहीं मन से भी ! किसी डरे हुए चूहे की तरह आप अपने बिल में घुस जाते हैं । बिल का दरवाजा ज़ोर से बंद कर लेते हैं ताकि वहां दुनिया की कोई कराह , कोई चीख आप तक ना पहुंच पाए । मगर अखबार की खबर , टीवी की रिपोर्ट और लगातार चलते व्हाट्सएप संदेशों पर सवार होकर मौत आप तक पहुंचती है ! और आपकी ताकत का ही नहीं , आपके अच्छे इंसान होने का भरम भी टूटता है ।

अचानक आपको लगता है कि चारों तरफ आईने हैं और आप एकदम नंगे हो गए हैं।

नाश्ता करते हुए आप अखबार पलटते हैं । पहले पन्ने पर लाशों की लंबी कतार है , जलने के लिए इंतजार करते हुए। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए खाया पनीर आपके हलक में फंस जाता है । अस्पताल के गेट पर लोग ऑक्सीजन के लिए तड़प रहे हैं , और इधर आपका एयर कंडीशनर लगातार ठंडी हवा फेंक रहा है । वे जिनसे आप हमेशा गले लग कर मिलते थे , उन्हें ठीक उसी दिन गले ना लगा पाए जिस दिन उन्हें उसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी ।

आपका दोस्त गुजर गया है , आपको पता है कि उसके छोटे बेटे की आंसुओं के सैलाब में डूबी आंखें इस वक्त आपको तलाश रही होंगी । उसकी आंखों से बचने के लिए आप अपनी नजरें टीवी में घुसा देते हैं । उस की सुबकियों की आवाज आपके कानों तक न पहुंचे इसलिए आप टीवी का वॉल्यूम बढ़ा देते हैं ।

अपनी शर्म को ढकने के लिए आप व्हाट्सएप की शरण में जाते हैं । वहां कुछ संदेशे हैं । अस्पतालों की हेल्पलाइन के नंबर हैं । आप जल्दी जल्दी उन लोगों को फॉरवर्ड करते हैं जिन्होंने आपसे मदद मांगी थी । यह जानते हुए भी यह तमाम फोन कोई नहीं उठाएगा ।

आप सुरक्षित हैं। आपके बीवी बच्चे आपके ऑक्सीजन का सेचुरेशन नाप रहे हैं । बधाई हो । ऑक्सीजन लेवल एकदम ठीक है । कोई आपकी आत्मा की ऑक्सीजन का सेचुरेशन क्यों नहीं नापता ,जिस का दम घुट रहा है । आपको आपकी आत्मा की सांसें घुटती हुई महसूस हो रही हैं । शायद आपकी आत्मा को वेंटिलेटर चाहिए । तुरंत ! जल्द कुछ नहीं किया तो शर्म और लाचारी का वायरस आपकी आत्मा को सौ फीसदी संक्रमित कर देगा ।
अगर आपकी आत्मा मर गई तो फिर?

थक कर आप सोचते हैं अच्छा है ! जो होना है एक बार हो ही जाए । तमाम लोग बगैर आत्मा के जी ही रहे हैं आप भी जी लेंगे। आप जल्दी-जल्दी विटामिन सी की टेबलेट चूसने लगते हैं।

डिसक्लेमर:ये लेखक के निजी विचार है.

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