
Ranchi/Deoghar: पीजीटी शिक्षक बहाली में एक बोलने और सुनने वाले शख्स योगेंद्र कुमार की नियुक्ति मूक बधिर आरक्षण वाले कोटे में होने की खबर मीडिया में आने के बाद शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच करने का निर्देश देवघर डीसी विशाल सागर को दिया। कहा गया था कि मामले की जांच कर 24 घंटों के अंदर रिपोर्ट विभाग को भेजी जाए। देवघर डीसी ने मामले को लेकर तुरंत जांच समिति बनायी जिसमें देवघर के सिविल सर्जन डॉ. रंजन सिन्हा को भी रखा गया था। सूत्रों की माने तो सिविल सर्जन ने अपनी जांच रिपोर्ट डीसी को सौंप दी। लेकिन उस रिपोर्ट को देवघर प्रशासन की तरफ से संदेह के घेरे में रखा गया है। अब फिर से दूसरी जांच कमेटी का गठन हुआ है। इस बार कमेटी में एम्स के डॉक्टरों को रखा गया है। जिससे मामले की जांच निष्पक्ष हो।
सिविल सर्जन की भूमिका सवालों के घेरे में

देवघर डीसी विशाल सागर की तरफ से बनी पहली जांच कमेटी में डॉ. रंजन सिन्हा शामिल थे। उन्होंने रिपोर्ट बनाकर डीसी को सौंपी भी दी। लेकिन पूरी जांच रिपोर्ट ही सवालों के घेरे में है। दरअसल, डॉ. रंजन सिन्हा ने ही योगेंद्र कुमार को मूक बधिर होने का प्रमाण पत्र दिया था। जिसके आधार पर योगेंद्र पीजीटी परीक्षा में शामिल हुआ और उसे नियुक्त मिली। जबकि योगेंद्र कुमार साफ तौर से बोल और सुन सकता है। ऐसे में उस डॉक्टर को कैसे जांच कमेटी में रखा जा सकता है, जिसने खुद ही मूक बधिर होने की पुष्टि की थी, जो कि गलत है। इसलिए अब डीसी की तरफ से दूसरी जांच समिति बनी है, जिसमें एम्स के डॉक्टरों को शामिल किया गया है।
सूत्र बता रहे कि सीएस ने सौंपी बेतुकी रिपोर्ट

देवघर के सिविल सर्जन कार्यालय के सूत्रों की बात करें तो सिविल सर्जन डॉ. रंजन सिन्हा ने जो रिपोर्ट डीसी को सौंपी थी, वो बेतुकी थी। सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में डॉ. रंजन सिन्हा फंसते नजर आ रहे हैं। क्योंकि इन्होंने ही योगेंद्र कुमार को मूक बधिर होने का प्रमाण पत्र सौंपा था। सूत्रों का यह भी कहना है कि डॉ. रंजन सिन्हा ने जो रिपोर्ट डीसी को सौंपी है। उसमें कहा गया है कि योगेंद्र कुमार पहले मूक बधिर था, लेकिन धीरे-धीरे वो बोल और सुन पा रहा है। सीएस डॉ. रंजन सिन्हा की ऐसी रिपोर्ट के बाद उन्हें वरीय अधिकारियों की डांट भी सुननी पड़ी है। इसके बाद दूसरी जांच टीम गठन की गयी है।
जांच टीम में एम्स के डॉक्टर, जल्द ही मिलेगी रिपोर्टः देवघर डीसी
इस मामले पर देवघर डीसी विशाल सागर ने कहा कि चूंकि सिविल सर्जन ने ही योगेंद्र को मूक बधिर होने का प्रमाण पत्र सौंपा था इसलिए वो जांच टीम में नहीं रह सकते। नयी जांच टीम का गठन किया गया है। इस टीम में एम्स के डॉक्टर भी है। जल्द ही रिपोर्ट विभाग को सौंप दी जाएगी।


