जरमुंडी/दुमका ।

जरमुंडी प्रखंड कार्यालय से महज 20 किलोमीटर दूरी पर है श्यामलपुर गांव। जहाँ सरकारी सिस्टम दम तोड़ता नज़र आ रहा।

जिस तरह केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक प्रदेश में सड़को का जाल बिछा रही है। वही आदिवासी बहुल गांव श्यामलपूर तक जाने के लिए पक्की सड़क तक नही है। कई ऐसे जरुतमन्द परिवार हैं, जिन्हें राशन तक नही मिला।

गांव की चुड़की मुर्मू की हालत भी कुछ ऐसी ही है, रहने को ढंग का घर तो छोड़िए, खाने के लिए राशन तक नही है। चुड़की भीख मांग कर अपना गुजारा कर रही है।
चुड़की की कहानी उसकी दर्द भरी दास्तां खुद बयां कर रही। घर मे तीन सदस्य है, एक चुड़की, उसकी बेटी और एक नन्ही सी नतनी ।
सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित चुड़की गांव और आसपास के इलाकों में भिक्षा टन कर खुद और अपनी बेटी व नतनी का पेट भरती हैं। अक्सर गांव के लोग इनकी मदद कर जाते हैं, लेकिन प्रशासन की नज़र आजतक इनपर नही पड़ी है।
चुड़की की मदद के लिए समाज सेवी सचिनन्द और रिंकू मोदी आगे आये।जरूरत के समान और राशन चुड़की के घर पहुंचाया। इस वक़्त उनके चेहरे पर खुशी साफ नज़र आ रही थी।
वहीं, जब चुड़की के घर की हालत से मीडिया ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को जानकारी दी। तो BDO ने नियमानुसार हर योजनाओं का लाभ देेने की बात कही है।
अब, देखना दिलचस्प होगा कि सिस्टम कब चुड़की और चुड़की जैसे न जाने कितने परिवार होंगे, जिन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ देती है।



