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देश की सबसे बड़ी कोल खदान में अब दौड़ेगी मोनो रेल

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रिपोर्ट: बिपिन कुमार  

धनबाद:

कोल इंडिया के कोलकर्मी  जल्दी ही मोनो रेल से भूमिगत खदान में उतरेंगे। मोनो रेल से ही भूमिगत खदान के अंदर जा कोयला उत्पाद कर सकेंगे।जल्द ही बीसीसीएल के वेस्टर्न झरिया एरिया के मुनीडीह खदान में मोनो रेल का ट्रायल सफल रहा है। यहां खदान के अंदर इसका विस्तार किया गया है। इसका पूरे खदान में सात किमी एरिया में विस्तार किया जाना है। इस बनाने में 1200 करोड़ की लागत लग रही है। जो देश का पहला मोनो रेल परियोजना है किया है. 

पहले जान जोखिम डालकर काम करते थे कोलकर्मी : 

धनबाद में भूमिगत खदानों में उतरना काफी जोखिम भरा होता है। कामगार सिर पर टोपी और लाइट, हाथ में डंडा और पीठ पर बैटरी बांधकर सीढ़ियों या रस्सा से बनी डोली से भूमिगत खदान में उतरते हैं। कामगारों को कम से कम तीन किलोमीटर तक इसी तरह अंदर जाना पड़ता है और बाहर निकलना पड़ता है। कई खदान तो पांच-पांच किमी के दायरे में है। पानी रिसने से रास्ते में फिसलन का भी डर बना रहता है। 

अब मोनो रेल से होगा कोयला का उत्पाद :

रोजाना सीढ़ियों से अंदर जाने और बाहर निकलने के कारण कामगारों को काफी परेशानी होती है। इसी परेशानी से निजात दिलाने के लिए बीसीसीएल ने चीन की मदद से मोनो रेल का 7 किलो मीटर का ट्रैक दो साल में प्रोजेक्ट पूरा करना है. इसी रास्ते से बड़ी ट्रॉली से कोयला भी निकाला जाएगा। देश में यह योजना सबसे पहले झरिया में शुरू हो रही है। कोल इंडिया अगले वित्तीय वर्ष में अपनी अन्य अनुशांगिक इकाइयों में भी यह योजना शुरू की जाएगी।

देश का पहला होगा ये मोनो रेल परियोजना :

बीसीसीएल के वेस्टर्न झरिया एरिया के जीएम जेएस महापात्रा ने कहा कि मुनीडीह खदान में मोनोरेल का ट्रायल सफल रहा है। दो साल के भीतर हर हाल में पूरे खदान में इसे लागू कर देना है। यह टू इन वन के रूप में काम करेगा। यानी इसी रास्ते से मोनोरेल से कामगार खदान में उतरेंगे और इसी रास्ते से बड़ी ट्रॉली से काेयला भी बाहर निकाला जाएगा। यह योजना कोल इंडिया में ऐतिहासिक और सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।

बता दें कि देश की सबसे बड़ी कोल खदान में अब मोनो रेल दौड़ेगी। देश का पहला मानो रेल परियोजना धनबाद में शुरू होने जा रहा है. एक बोगी में 6 से 14 लोग एक साथ जा सकेंगे। मार्च 2017 में यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ था। 11 मई 2018 को ट्रायल सफल रहा। 1200 करोड़ का यह प्रोजेक्ट दो साल में पूरा होगा। 7 किलो मीटर लम्बा होगा ये ट्रैक।

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