गिरिडीह:

इंडिया शाइनिंग की हकीकत को गिरिडीह का एक गांव बखूबी बयां कर रहा है. एक ऐसा गांव जहाँ के लोग को आज भी पीने का शुद्ध पानी मयस्सर नहीं है. एक बड़ी आबादी गड्ढे का गंदे पानी से अपनी रोजमर्रा की ज़िन्दगी गुजार रहा. यह गाँव है गिरिडीह जिले का बुधवाडीह टोला. जो अपनी कहानी कुछ इस तरह बयाँ करता है.

मैं गिरिडीह जिले का बुधवाडीह टोला हूँ. गरीबी, तंगहाली और बदनसीबी हमारी नियति है. तमाम तरह की बुनियादी सुविधाओं से बेख़बर मैं वर्षो से अच्छे दिन आने की राह तक रहा हूँ. लेकिन मानो जैसे मैं आज भी आजाद देश का एक गुलाम गांव हूँ. आजादी के बाद की कहानी तो छोड़ दिजीये हालिया दिनों में शाइनिंग इंडिया, डिजिटल इंडिया आदि का शोर मेरी आँखों में उम्मीद की एक किरण जगा गया था. लेकिन शायद शाइनिंग इंडिया की जगमगाहट के बीच हमारी सुबकती हुई श्याह रात की भोर कही गुम सी हो गई.

जी हाँ यह व्यथा है एक ऐसे गांव की जहाँ आज तक अन्य सुविधाएं तो छोड़ दिजीये, सबसे मूल जरूरत यानी पानी के लिए ही त्राहिमाम मचा है. वर्षो के इंतजार के बाद भी इस गांव के लोग आज भी गंदले नदी व चुवे का अशुद्ध पानी पीने को मजबूर हैं.

कहने को तो भारत गांवों का देश है और देश तरक्की कर रहा है. लेकिन इस गांव की सूरत सरकार की सीरत को बयां करने के लिए काफी है. यहाँ आज भी ग्रामीण नाले में गड्ढा खोद पानी पीकर जीवन जीने को मजबूर है. असल में सदर प्रखंड क्षेत्र के बजटो पंचायत का बुधुआडीह टोला का दिनचर्या दुरभार्ताओं से भरा हुआ है. यहाँ गुजर-बसर कर रहे करीब दो सौ ग्रामीण आज के इस आधुनिक युग में भी सूखे हुए नाले में गड्ढा खोद कर पानी पीने को अपनी नियति मान चुके हैं. स्थानीय शब्दों मे इस गड्ढे को चुआं कहते हैं. इस चुआं को खोद कर सुबह-सुबह गांव की महिलाएं पीने की पानी अपने घर ले जाती है फिर दिन भर अवारा जानवर इस पानी को अपने मलमूत्र से दूषित करते हैं. बाद में शाम को पुनः वही दूषित पानी पीने को इस गांव के लोग अभिशप्त हैं. दूषित पानी पीने के कारण आये दिन यहाँ के ग्रामीण तरह-तरह की बीमारियों का शिकार होते जा रहे हैं.
स्थानीय ग्रामीण महिला सावित्री देवी कहती है कि हमलोगों की ये रोज की आदत बन चुकी है. स्थानीय मुखीया की पहल पर कुछ साल पूर्व एक चापानल का निर्माण कराया गया था लेकिन जनसंख्या ज्यादा होने के कारण ज्यादा उपयोग के कारण छः माह पूर्व ही खराब हो गया, तब से पुनः हम लोग नाले की पानी पीने को मजबूर है.
इधर गांडेय विधानसभा क्षेत्र से दो बार प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सरफराज अहमद भी मानते है कि इलाके में पेयजल का घोर संकट है. जिला प्रशासन को चाहिए कि तत्काल इसकी सूचना स्वच्छता एवं पेयजल विभाग को देकर पेयजल सुविधा मुहैया कराने की पहल करे.
गांडेय प्रखंड के बीडीओ ने मामले में अनिभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है. अगर ऐसी बात है तो तत्काल पानी की व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन से आग्रह करेंगे.
बहरहाल, चाहे जनप्रतिनिधी हों या हुक्मरान. हर बार गलती पकड़े जाने के बाद आजकल खूब बारीकी से सफाई पेश कर निकल भागते हैं. लेकिन सवाल एक्सक्यूज़ देने का नहीं बल्कि दो सौ लोगों के जान के साथ खिलवाड़ का है. आखिर कब तक सुंदर लफ्फाजियों के सहारे ऐसे जानलेवा दृश्य पर पर्दा डाला जाता रहेगा.



