
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कितने समय में पूरी की जाएगी। अदालत ने सरकार को 10 सितंबर तक इस संबंध में स्पष्ट जानकारी देने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और अधिवक्ता प्रिंस कुमार ने अदालत को बताया कि असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (एसीएफ) और रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (आरएफओ) की नियुक्ति के लिए चल रही परीक्षा प्रक्रिया सरकार की ओर से रद्द कर दी गई है।

इस पर अदालत ने सरकार से जेपीएससी में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया की समय-सीमा बताने को कहा। अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि जेपीएससी एक संवैधानिक संस्था है और इसका अध्यक्ष पद लंबे समय तक रिक्त नहीं रखा जा सकता।
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता को सरकार से निर्देश लेकर यह बताने को कहा था कि जेपीएससी के अध्यक्ष की नियुक्ति कब तक कर दी जाएगी। अदालत ने वन विभाग में रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आयोग के कामकाज को सुचारु रखना जरूरी माना था।
पिछली सुनवाई में जेपीएससी की ओर से अदालत को बताया गया था कि वन विभाग में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। एसीएफ और आरएफओ के लिए प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पूरी हो चुकी थी।
मुख्य परीक्षा का परिणाम भी जारी किया गया था और शारीरिक दक्षता परीक्षा की तारीख घोषित की गई थी। आयोग की ओर से अदालत को बताया गया था कि एसीएफ और आरएफओ की परीक्षा प्रक्रिया ही सरकार की ओर से रद्द कर दी गई है। इससे वन विभाग में लंबे समय से खाली पदों को भरने की प्रक्रिया को लेकर स्थिति बदल गई है। (IANS)



