
Ranchi: झारखंड में वज्रपात खूब कहर बरपा रहा है। पिछले 24 घंटे के दौरान झारखंड में वज्रपात से 20 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा 11 मौत गिरिडीह में हुईं। वहीं दर्जन भर लोग झुलस भी चुके हैं।

मौसम विभाग की ओर से लगातार लोगों को वज्रपात से सावधान रहने की सलाह दी जा रही है, लेकिन फिर भी वज्रपात से लोगों की मौत नहीं थम रही है। अधिकांश हादसे धान रोपनी, खेतों में काम करने, निर्माण स्थल पर काम करने या बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े रहने के दौरान हुए।

ये सभी मौतें गढ़वा, लातेहार, सिमडेगा, चतरा, गिरिडीह, दुमका और रामगढ़ में हुई हैं। केवल 24 घंटे के अंदर वज्रपात से 20 लोगों की मौत हो गई। ऐसे में सावधानी बरतना कितना जरूरी है।
सबसे बड़ा हादसा गिरिडीह के देवरी थाना क्षेत्र के देवपहाड़ी स्थित गोसांई आहर के पास हुआ। यहां पेड़ के नीचे मोबाइल पर गेम खेल रहे अर्जुन कुमार साव (17), विष्णुदेव साव (13), गजेंद्र साव (15), कुश कुमार तिवारी (18) और उमेश यादव (17) वज्रपात की चपेट में आ गए। अर्जुन, विष्णुदेव, गजेंद्र और कुश की मौत हो गई, जबकि उमेश गंभीर रूप से घायल है।
मृतकों में अर्जुन, विष्णुदेव और गजेंद्र चचेरे भाई थे। देवरी के तिलयडीह गांव में खेत में काम कर रहे संतोष तिवारी (40) की भी मौत हो गई, जबकि विक्रम तिवारी घायल हो गए। बगोदर थाना क्षेत्र के अलगडीहा में कोनार नहर निर्माण स्थल पर बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े लातेहार निवासी मजदूर समीर गिद (47) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि महावीर तुरी झुलस गए।
दुमका के रामगढ़ प्रखंड में आलतामुनी मरांडी (20), बाबूलाल हेंब्रम (30) और रोहित कुंवर (30) की मौत हो गई। आलतामुनी के पति और चार वर्षीय बेटे समेत छह से अधिक लोग झुलस गए। लातेहार में उपेंद्र उरांव (18) और शिवनाथ उरांव, चतरा के लावालौंग में संजय भुइयां (30), गढ़वा के रंका में कदरून खातून (45) तथा पलामू के मोहम्मदगंज में पुष्पा देवी (38) की भी वज्रपात से मौत हो गई। कई अन्य घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।
वज्रपात से रहे सावधान
मौसम विभाग की ओर से वज्रपात और आंधी-तूफान के खतरे को देखते हुए लोगों को खासतौर पर खराब मौसम के समय बाहर नहीं जाने की सलाह दी गई है। अगर आप खेत या खुले मैदान में हैं, तो मौसम खराब होने पर तुरंत वहां से हटकर किसी सुरक्षित स्थान या घर चले जाए। कभी भी खुले मैदान, पेड़ के नीचे या खेत में रुकने की गलती न करें, क्योंकि इन जगहों पर वज्रपात का सबसे ज्यादा खतरा होता है।



