
Ranchi : हाल के कुछ दिनों से एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल है। जो झारखंड ग्रामीण विकास विभाग के टेंडर से जुड़ा है। लेकिन, जिनके नाम से ये कथित लेटर वायरल हो रहा है उसे लिखने वाले ही अब फर्जी करार दे रहे हैं। अब इस वायरल चिट्ठी के हवाले से ही नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिख डाला है। लेकिन, अब इस लेटर को फर्जी विभाग के अभियंता ही बता रहे हैं।

दरअसल यह चिट्ठी ग्रामीण कार्य विभाग के कुछ इंजीनियरों की तरफ से लिखी हुई बतायी जा रही है। इस चिट्ठी में कई इंजीनियरों का हस्ताक्षर भी हैं। चिट्ठी विभाग के मुख्य अभियंता को लिखी गयी है। चिट्ठी में कहा गया है एक शख्स जिसका नाम बबलू मिश्रा है, वो टेंडर मैनेज करने के लिए इंजीनियरों पर दबाव बनाता है। अनाप-शनाप बोलता है। गाली-गलौच तक करता है। अब इस मामले को लेकर सियासत गर्म हो गयी है। चिट्ठी 23 अप्रैल की तारीख से है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इसी चिट्ठी के आधार पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र लिख दिया। पत्र में उन्होंने टेंडर सिंडीकेट पर लगाम लगाने की बात कही है। लेकिन अब इस कहानी में नया मोड़ आ गया है।

बाबूलाल के एक्स हैंडल पर सीएम को लिखी गयी चिट्ठी पोस्ट करने के बाद, मामले ने तुल पकड़ा। कुछ इंजीनियरों के हस्ताक्षर वाली चिट्ठी के हवाले से नेता प्रतिपक्ष ने सीएम हेमंत को इसपर संज्ञान लेने की बात कही। लेकिन मामले में ट्विट्स तब आया जब खुद विभाग के इंजीनियर ही इस चिट्ठी को फर्जी बता रहे हैं। उनका कहना है कि हमने तो ये चिट्ठी कभी लिखी ही नहीं।
अब, विभाग के इंजीनियरों ने अपने मुख्य अभियंता को एक पत्र लिखा है। उस पत्र में विभाग के इंजीनियर कह रहे हैं कि यह चिट्ठी उन्होंने कभी अपने मुख्य अभियंता को लिखी ही नहीं है। जो पत्र सोशल मीडिया पर वायरल है। साथ ही जिस पत्र के हवाले से नेता प्रतिपक्ष ने सीएम को पत्र लिखकर टेंडर घोटाले पर गंभीरता से जांच करने की बात कही, वो पत्र किसी भी अधिकारी की तरफ से रिसीव ही नहीं की गयी है।
ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि आखिर जब विभाग के इंजीनियरों ने चिट्ठी लिखी ही नहीं, तो बाबूलाल मरांडी के पास यह चिट्ठी कैसे पहुंची। क्या ये बबलू मिश्रा नामक शख्स के खिलाफ कोई साजिश है या फर्जी लेटर के जरिये ग्रामीण विकास विभाग को निशाने पर लेने की तैयारी। इस मामले पर गंभीरता से जाँच होनी चाहिए।



